मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में मजबूत तेजी के साथ आगे बढ़ रहे सेंसेक्स और निफ्टी ने कुछ ही घंटों में अपनी बढ़त गंवा दी। दिन के उच्चतम स्तर से सेंसेक्स 1,400 अंकों से अधिक नीचे आ गया, जबकि निफ्टी में करीब 449 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक आए उलटफेर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स के दिन के उच्चतम स्तर से फिसलने के दौरान बीएसई के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 8.78 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। जानकारों ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और इंडिया विक्स में उछाल को बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले संभावित कारणों में शामिल किया।
शुरुआती 40 मिनट में बाजार ने पकड़ी थी रफ्तार
मंगलवार को दशहरे के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहने के बाद बुधवार को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई। निवेशकों की नजरें जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ी गतिविधियों पर भी थीं। शुरुआती कारोबार में खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत बढ़त दर्ज की। कारोबार के शुरुआती 40 मिनट के दौरान सेंसेक्स करीब 829 अंक चढ़कर दिन के उच्चतम स्तर 74,682.19 अंक तक पहुंच गया। इसी दौरान निफ्टी में भी लगभग 232 अंकों की तेजी आई और यह 23,120.90 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की इस तेजी से निवेशकों को उम्मीद जगी थी कि कारोबार के दौरान सकारात्मक रुझान बना रह सकता है। हालांकि, शुरुआती उत्साह ज्यादा देर तक कायम नहीं रहा। ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के साथ बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट तेज हो गई।
कुछ ही घंटों में सेंसेक्स और निफ्टी ने गंवाई बढ़त
दोपहर करीब 1 बजकर 45 मिनट तक बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई थी। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1,400.41 अंक फिसलकर 73,281.78 अंक पर आ गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी अपने दिन के शिखर से 448.65 अंक नीचे आकर 22,672.25 अंक पर कारोबार करता दिखाई दिया। इस तेज गिरावट ने सुबह की तेजी के दौरान बने सकारात्मक माहौल को कमजोर कर दिया। बाजार में निवेशकों की मुनाफावसूली के साथ अन्य दबावों ने भी सूचकांकों की चाल को प्रभावित किया। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय हो सकती है। इसके साथ इंडिया विक्स में उछाल बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत देता है।
बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली
बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के अनुसार, बजाज फाइनेंस, आयशर मोटर्स और इटरनल के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। श्रीराम फाइनेंस और नेस्ले इंडिया के शेयर भी करीब 3 प्रतिशत तक नीचे आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर भी बजाज फाइनेंस और इटरनल के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। इसके अलावा मारुति सुजुकी, ट्रेंट और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयरों में 2.50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख शेयरों में बिकवाली ने बाजार के समग्र रुझान पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में गिरावट की वजहों का आकलन उनके ताजा कारोबार और कंपनी संबंधी घटनाक्रम के आधार पर करना जरूरी है।
निवेशकों की संपत्ति में 8.78 लाख करोड़ रुपये की कमी
शेयर बाजार में आई गिरावट का असर कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जब सेंसेक्स 74,682.19 अंक के दिन के उच्चतम स्तर पर था, उस समय बीएसई का बाजार पूंजीकरण 4,68,30,040.07 करोड़ रुपये था। इसके बाद सेंसेक्स के 73,281.78 अंक तक गिरने पर बीएसई का बाजार पूंजीकरण घटकर 4,59,51,902.24 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह दोनों स्तरों के बीच बाजार पूंजीकरण में 8,78,137.83 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। यह आंकड़ा बाजार के कुल मूल्य में आई गिरावट को दर्शाता है। इसे हर निवेशक के वास्तविक नुकसान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि व्यक्तिगत नुकसान संबंधित निवेश और शेयरों की कीमतों में बदलाव पर निर्भर करता है।