जम्मू-कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत का बयान

अमेरिका के भारत में राजदूत, साथ ही दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विशेष दूत सर्जियो गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर का पहली बार दौरा किया।;

By :  DB Desk
Update: 2026-08-20 21:20 GMT

अमेरिका के भारत में राजदूत, साथ ही दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विशेष दूत सर्जियो गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर का पहली बार दौरा किया। गोर ने जम्मू-कश्मीर को 'भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्साÓ बताया। जो हर तरीके से सही बयान है, लेकिन इस बयान को देने का वक्त और इसके पीछे अमेरिका की मंशा इन सब पर अब सवाल उठ रहे हैं। खासकर जिस तरह पाकिस्तान में इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आई है, वह जाहिर कर रही है कि मामला केवल इतना ही नहीं है। क्योंकि सर्जियो गोर ने कोई ऐसी बात नहीं कही, जो दुनिया नहीं जानती। लेकिन पाकिस्तान इस बात को हमेशा नकारता है और जम्मू-कश्मीर पर अपना दावा ठोंकता रहता है। इसी वजह से कई बार दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़े हैं। अतीत में कई बार अमेरिका पाकिस्तान के पलड़े की तरफ झुका दिखाई दिया है। हालांकि भारत ने तब भी बिना दबाव में आए यही दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के साथ विवाद को दोनों पक्ष ही मिलकर सुलझाएंगे, इसमें किसी तीसरे के लिए स्थान नहीं है। मगर डोनाल्ड ट्रंप बार-बार किसी न किसी तरह भारत और पाकिस्तान के बीच आ ही जाते हैं।

पहलगाम हमलों के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का दावा डोनाल्ड ट्रंप ने सौ से ज्यादा बार किया है। पाकिस्तान ने भी बाकायदा ट्रंप को धन्यवाद ज्ञापित किया है। मगर भारत ने इस बात को नहीं माना कि उसने किसी के कहने पर ऑपरेशन सिंदूर बंद किया। खेद इस बात का है कि नरेन्द्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को दो टूक जवाब नहीं दिया कि आप ऐसे दावे न करें, यह सही नहीं है। अगर मोदी ऐसा करते तो शायद इस समय अमेरिकी राजदूत जम्मू-कश्मीर पर अपना प्रमाणपत्र नहीं देते और न सत्तारुढ़ भाजपा उसे लपक कर लेती। भाजपा ने गोर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि 'सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। यह एक स्पष्ट संदेश है, जिसे ज़मीन पर स्वीकार किया गया है और दुनिया ने भी मान्यता दी है।Ó

भाजपा इस उतावलेपन की जगह अगर केवल यही लिखती कि जो बात जगजाहिर है, वही सर्जियो गोर ने कही है, तो बेहतर रहता। बहरहाल, सर्जियो गोर के बयान के बाद भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अब कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार से लेकर गुरुवार तक तीन अहम घटनाएं घटित हुईं, पहली सर्जियो गोर का बयान, दूसरी, पाकिस्तान का अमेरिकी राजनयिक को तलब करना और तीसरी दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायुक्त के बाहर सुरक्षा ढांचे हटाया जाना। बता दें कि पाकिस्तान ने इस बयान को लेकर इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रभारी राजदूत नताली बेकर को तलब किया और अपना विरोध दर्ज कराया। इसी बीच नयी दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायुक्त के बाहर लगे सुरक्षा बैरिकेड, ट्रैफिक बोलार्ड और कतार नियंत्रित करने वाले ढांचे भी हटा दिए गए हैं। हालांकि करीब तीन दिन पहले पाकिस्तान में इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त के बाहर सुरक्षा बैरिकेड हटाए गए थे। तो दिल्ली की कार्रवाई को जैसे को तैसा कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

अब आगे यह देखना होगा कि भारत और पाकिस्तान का विरोध केवल उच्चायुक्तों की सुरक्षा कम करने तक सीमित रहता है, या फिर यह तनाव और बढ़ेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम के बाद संबंधों में कड़वाहट काफी बढ़ चुकी है। शाहबाज शरीफ से न देश संभल रहा है, न जनरल आसिम मुनीर पर उनका कोई बस है। डोनाल्ड ट्रंप आसिम मुनीर की कई बार तारीफ कर चुके हैं। ऐसे में इस समय अमेरिका पाकिस्तान को परेशान करने वाला बयान क्यों दे रहा है, यह सवाल भी बना हुआ है।

ध्यान रहे कि अतीत में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर मुद्दे पर अक्सर 'कश्मीरी लोगों की इच्छाओंÓ का उल्लेख करते रहे हैं। पाकिस्तान इस भाषा को अपने पक्ष के समर्थन के रूप में देखता रहा है, जबकि भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को लगातार खारिज करता रहा है और कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा बताता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में और उसके बाद भी कई मौकों पर भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी। ऐसे में गोर का जम्मू-कश्मीर को सीधे तौर पर 'भारत का महत्वपूर्ण हिस्साÓ बताना पाकिस्तान के लिए विशेष रूप से तो संवेदनशील है ही, भारत को भी इसमें बहुत खुश होने की जगह संभल कर विश्लेषण करने की जरूरत है। इस बयान के बाद अगर इस्लामाबाद में भी अमेरिका का यही रुख रहता है, तब तो यह माना जाए कि अमेरिका अपनी पुरानी नीति छोड़ रहा है, लेकिन अगर यहां एक बात और वहां दूसरी बात वह करेगा, तो फिर ऐसे बयानों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।

फिलहाल सर्जियो गोर ने एक बात यह भी कही है कि वह जम्मू-कश्मीर में यात्रा निर्देशों को लेकर थोड़ी ढील बरत सकता है। अभी तक पहलगाम के बाद जारी चेतावनी ही लागू हैं, जिसमें अमेरिका ने अपने लोगों को जम्मू-कश्मीर न जाने की सलाह दी है। गोर ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन इस चेतावनी की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे नीचे किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इससे जम्मू-कश्मीर में पर्यटन उद्योग को थोड़ी राहत मिल सकती है।

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