विपक्ष को मिली आंशिक सफलता

राहुल गांधी यानी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष आखिरकार बुधवार को संसद में भाषण दे पाए। पिछले सोमवार जब उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने की कोशिश की थी

By :  Deshbandhu
Update: 2026-02-11 21:40 GMT

राहुल गांधी यानी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष आखिरकार बुधवार को संसद में भाषण दे पाए। पिछले सोमवार जब उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने की कोशिश की थी, तो लगातार उन्हें दो दिन रोका गया और फिर बिना चर्चा के ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया। गनीमत है कि बजट पर ऐसा नहीं हुआ और राहुल गांधी ने संसद में अपना भाषण दिया। राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा करते हुए केंद्र सरकार पर देश की संप्रभुता और डेटा को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने का गंभीर आरोप लगाया। राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट्स के 'ग्रिप' और 'चोक' तकनीक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाहरी ताकतों के दबाव में 'सरेंडर' कर चुके हैं। अपने भाषण की शुरुआत में राहुल ने बताया कि मार्शल आर्ट्स में लक्ष्य होता है प्रतिद्वंद्वी पर पकड़ बनाना। एक बार पकड़ आ गई, तो गला चोक किया जाता है और विपक्षी 2-3 बार थपथपा करके समर्पण कर देता है। यही आज भारत की राजनीति में हो रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि मार्शल आर्ट्स में तो ग्रिप, चोक और सरेंडर सब नजर आते हैं, लेकिन राजनीति में ऐसा नहीं होता।

इसके बाद राहुल गांधी ने आर्थिक सर्वे पर अपनी बात रखी और कहा कि मैं आर्थिक सर्वेक्षण देख रहा था। मुझे दो मुख्य बिंदु मिले। पहला, हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहां भू-राजनीतिक संघर्ष तीव्र होता जा रहा है। चीन, रूस और अन्य शक्तियां संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभुत्व को चुनौती दे रही हैं।

दूसरा, हम ऊर्जा और वित्तीय हथियारों के युग में जी रहे हैं। इसका मुख्य अर्थ यह है कि हम स्थिरता के युग से अस्थिरता के युग की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है, और हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने भी यही कहा है, कि युद्ध का युग समाप्त हो गया है। वास्तव में, हम युद्ध के युग में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए हम अस्थिरता के युग में प्रवेश कर रहे हैं। डॉलर को चुनौती मिल रही है, और अमेरिकी वर्चस्व को भी चुनौती मिल रही है। हम एक महाशक्ति के युग से एक ऐसे नए युग की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी हम भविष्यवाणी नहीं कर सकते। यह एक अस्थिर दुनिया है, और आर्थिक सर्वेक्षण भी यही कहता है, और मैं इससे सहमत हूं।

राहुल गांधी ने ईरान, यूक्रेन जैसे वैश्विक युद्धों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया एक खतरनाक दौर में है। राहुल ने दावा किया कि अमेरिका और चीन के बीच की लड़ाई में सबसे कीमती चीज़ 'इंडियन डेटा' है। यानी आम भारतीयों की निजी जानकारी जिस तरह डेटा में तब्दील होकर वैश्विक शक्तियों के पास पहुंच रही हैं, उस पर राहुल ने चिंता जताई। साथ ही अमेरिका से डील को उन्होंने बराबरी का सौदा नहीं माना और दावा किया कि इंडिया गठबंधन होता तो ट्रंप से बराबरी पर बात करता, लेकिन मौजूदा सरकार ने 'नौकर' की तरह डेटा सौंप दिया है। वहीं किसानों के हक की आवाज़ उठाते हुए राहुल ने कहा कि मोदीजी ने अमेरिका के लिए दरवाजे खोलकर भारतीय किसानों को कुचलने की तैयारी की है। हमारे किसानों पर इतना बड़ा हमला कभी नहीं हुआ। वहीं बांग्लादेश पर अमेरिका ने शून्य टैरिफ लगाया है, जिससे भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा, इस पर राहुल ने मोदी सरकार को घेरा।

राहुल जब बिंदुवार तरीके से मोदी सरकार को बजट और अमेरिका से सौदे पर घेर रहे थे, तब सदन में बैठे सत्तापक्ष के लोग काफी बेचैन दिख रहे थे। इसके बाद राहुल गांधी ने जैसे ही अनिल अंबानी, हरदीप पुरी और एपस्टीन फाइल्स का जिक्र किया। उन्हें फौरन नियम याद दिलाए जाने लगे। जगदंबिका पाल ने उन्हें बजट पर बोलने को कहा, और कहा कि जो सदन का सदस्य नहीं है, अपना पक्ष रखने के लिए यहां नहीं है, उस पर आप आरोप नहीं लगा सकते। इस पर के सी वेणुगोपाल ने पूछा कि क्या नियम केवल हमारे लिए हैं, क्योंकि इसी सदन में कुछ दिन पहले दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्रियों पर भी बेतुके आरोप लगाकर कीचड़ उछाला गया था। बहरहाल, बार-बार की टोका-टाकी के बाद भी राहुल रुके नहीं और उन्होंने सनसनीखेज दावा किया कि अनिल अंबानी का नाम 'एपस्टीन फाइल्स' में है, इसलिए वे जेल में नहीं हैं। उन्होंने हरदीप पुरी का नाम भी इस विवाद से जोड़ा और कहा कि वे तो संसद के सदस्य हैं। अपने भाषण में राहुल ने पूछा कि क्या आपको देश को बेचने में, हमारी मां, भारत माता को बेचने में शर्म नहीं आई। राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी का नाम भी लिया कि अमेरिका में उनके खिलाफ मामला है, इसका भी संबंध इस ट्रेड डील से है। हालांकि अडानी का नाम आते ही फिर से राहुल को टोकने और बोलने से रोकने का सिलसिला शुरु हो गया।

इस तरह राहुल गांधी ने एक बार फिर विपक्ष की ताकत और सच की ताकत का एहसास भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को करा दिया। हालांकि जगदंबिका पाल ने उन्हें दो-तीन बार राहुल-राहुल कह कर टोका तो कांग्रेस ने इस पर भी आपत्ति जताई है कि आप भाजपा के सदस्यों के लिए जी और राहुल गांधी के लिए केवल राहुल कैसे कह रहे हैं। लेकिन इस तरह का पक्षपात अब बार-बार जनता देख ही रही है। आज राहुल गांधी ने जितनी बार प्रधानमंत्री मोदी पर हमला किया, भाजपा सांसद परेशान दिखे। आखिरकार जगदंबिका पाल ने नियम 352 का हवाला देकर कहा कि प्रधानमंत्री के विरुद्ध कोई भी आरोप इस नियम के अंतर्गत वर्जित है। लेकिन असल में नियम 352 के अनुसार, प्रधानमंत्री को उच्च पदस्थ व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। यह नियम केवल भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपालों, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त और अन्य संवैधानिक/वैधानिक प्राधिकरण जिनकी स्वतंत्र स्थिति और गरिमा की रक्षा करना सदन का दायित्व है, उन पर लागू होता है। प्रधानमंत्री इस दायरे में नहीं आते हैं, इसलिए उन पर किसी मुद्दे को लेकर आरोप लगाना गलत नहीं है। मगर इस समय भाजपा के साथ-साथ सारे संवैधानिक पदों को भी प्रधानमंत्री के रक्षा कवच के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है। अडानी, अंबानी, ट्रंप, एपस्टीन फाइल्स ये सब महज सनसनीखेज नाम और मुद्दे नहीं हैं, देश की अर्थव्यवस्था, रक्षा सौदे, किसानों के हित और सबसे बढ़कर हमारी संप्रभुता को गिरवी रखने के औजार हैं। राहुल देश को इसी गिरफ्त से आजाद कराने की कोशिश में हैं, जिसमें मंगलवार को उन्हें आंशिक सफलता मिली।

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