अंकिता भंडारी के लिए इंसाफ की मांग
नरेन्द्र मोदी ने एक 19 बरस की मासूम लड़की की नृशंस हत्या पर इंसाफ मांगने वाले उसके मां-बाप पर जो जुल्म ढाया है;
बेटी बचाने के नारे गढ़ने वाले, लड़कियों के मुंह से अपशब्द सुनकर सांस्कृतिक झटका खाने वाले, नवरात्रि में शक्ति की आराधना के लिए पूरे नौ दिन व्रत रखने का दावा करने वाले नरेन्द्र मोदी ने एक 19 बरस की मासूम लड़की की नृशंस हत्या पर इंसाफ मांगने वाले उसके मां-बाप पर जो जुल्म ढाया है, उसे देश भूलेगा नहीं। सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। 18 सितंबर को अंकिता लापता हुई और छह दिन बाद 24 सितंबर को उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। पता चला कि रिजॉर्ट के मालिक कुछ खास लोगों की सेवा करने का दबाव अंकिता पर बना रहे थे। साफ शब्दों में कहें तो उसे यौन उत्पीड़न के लिए खुद को प्रस्तुत करने कहा जा रहा था। अंकिता ने इससे इंकार किया और अपनी गरीबी को शारीरिक शोषण का जरिया नहीं बनने दिया। लेकिन शक्ति और धन से संपन्न लोगों को यह इंकार पसंद नहीं आया और अंकिता की जान ही ले ली गई। यह सब किसी फिल्मी पटकथा जैसा लगता है। कई फिल्मों में हम ऐसे दृश्य देखते हैं जहां गरीब, मजबूर लड़कियों पर खलनायक ऐसे ही जबरदस्ती करता है। फर्क इतना ही है कि फिल्मों में अक्सर सुखांत होता है, खलनायकों को उनके किए की सजा मिलती है। मगर देश में मोदी सरकार ने अच्छे दिनों की जो फिल्म चलाई है, उसमें पीड़ितों के हिस्से में सजा और प्रताड़ना देने वालों को इनाम मिलता है।
अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई 2022 से अनवरत चल रही है। राज्य सरकार ने इसमें एसआईटी गठित की। इसमें तीन मुख्य आरोपियों पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को मई 2025 में दोषी ठहराया गया और अब वे जेल में उम्र क़ै द की सज़ा काट रहे हैं। लेकिन इस पूरे मामले में भाजपा नेता दुष्यंत गौतम का नाम भी सामने आया, जिन्हें अब मोदी सरकार ने सिक्किम का राज्यपाल बनाया है।
गौरतलब है कि अंकिता की हत्या के बाद तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए एफ़आईआर दर्ज कराई थी। दर्ज शिकायत के अनुसार, दुष्यंत गौतम ने आरोप लगाया था कि हरिद्वार के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सुनियोजित आपराधिक साजिश रची थी। लेकिन अब तक इस मामले की सच्चाई सामने नहीं आई है कि दुष्यंत कुमार सही कह रहे हैं, या उन पर आरोप लगाने वालों ने सच कहा है। इसके लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत होती है। लेकिन अब दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाकर उन्हें जांच से बचाने का दांव शायद भाजपा ने चल दिया है। अब सवाल यह है कि आखिर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की कौन सी मजबूरी थी जो उन्होंने ऐसे व्यक्ति को राज्यपाल बनाया, जिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। क्या भाजपा में कोई और नेता नहीं था, जिसे मोदी-शाह उपकृत करते। क्या मोदी-शाह नहीं जानते थे कि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर सवाल उठेंगे ही, लेकिन फिर भी उन्होंने यह फैसला लिया तो क्या इसके पीछे सत्ता पर बने रहने का घमंड है या सारे संस्थानों पर कब्जा करने का। क्या मोदी-शाह यह मानते हैं कि कोई कितना भी विरोध कर ले, उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अपनी सत्ता को लेकर इतनी बेफिक्री या निश्चिंतता आखिर उन्हें कहां से मिल रही है। बड़े से बड़े नेता भी जनता के बीच अपनी छवि को लेकर फिक्रमंद रहता है, लेकिन क्या कारण है कि मोदी-शाह ने अब ऐसी कोई भी फिक्र करना छोड़ दिया है।
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग को लेकर बुधवार शाम अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट पर ही धरने पर बैठ गए। रात तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, अल्का लांबा, सुप्रिया श्रीनेत समेत कई कांग्रेस नेता वहां पहुंचे। राहुल और प्रियंका तो देर रात वापस लौटे, लेकिन बाकी नेता वहीं मौजूद थे, लेकिन तड़के साढ़े तीन-चार बजे दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता समेत कई लोगों को इंडिया गेट पर हिरासत में ले लिया, और कुछ देर हिरासत में रखे जाने के बाद उन्हें सुबह पांच बजे छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने सुबह छह बजे के पहले एक महिला को हिरासत में लेकर फिर से कानून विरोधी काम किया, लेकिन अब ऐसे कामों की सूची लंबी ही होती जा रही है।
हालांकि अब सरकार के ऐसे जुल्मों के खिलाफ पीड़ित जमकर आवाज उठा रहे हैं। अंकिता भंडारी की मां ने कहा कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, तब तक वे विरोध करती रहेंगीं। उन्होंने कहा, 'हम ऐसे बैठे रहेंगे, चाहे हम अपने घर में रहेंगे। अगर हमें नहीं बैठने देंगे तो हम अपने घर में भूख हड़ताल में बैठ जाएंगे।' वहीं अंकिता के पिता ने कुछ मांगें रखी हैं, जैसे अंकिता मामले में सीबीआई की पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त जज की सीधी निगरानी में कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि वनंतरा रिसॉर्ट को ध्वस्त करने का आदेश किसने दिया था और पुलकित आर्य के फोन की 18 और 19 सितंबर की कॉल डिटेल की बारीकी से जांच की जाए, ताकि पता चल सके कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का तो दावा है कि राज्य सरकार की एसआईटी जांच से इंसाफ मिल चुका है, लेकिन अगर अब भी पीड़िता के मां-बाप इसे इंसाफ नहीं मान रहे और कुछ मांगें रख रहे हैं, तो उन्हें मानने में सरकार को हर्ज क्यों होना चाहिए। मोदी-शाह अगर जनता की नाराजगी और उसकी अपेक्षाओं को इसी तरह नजरंदाज कर सत्ता की अकड़ दिखाते रहे तो यह समूची भाजपा को दूरगामी नुकसान पहुंचाएगा।