दो वर्षों में बदली ओडिशा की तस्वीर: मोहन चरण माझी सरकार का विकास, सुशासन और निवेश मॉडल

जून 2024 में जब ओडिशा की जनता ने राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता सौंपी, तब यह केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि विकास और सुशासन की नई अपेक्षाओं का जनादेश भी था।;

Update: 2026-06-18 13:00 GMT

जून 2024 में जब ओडिशा की जनता ने राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता सौंपी, तब यह केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि विकास और सुशासन की नई अपेक्षाओं का जनादेश भी था। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में बनी सरकार ने दो वर्षों के भीतर कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिन्होंने ओडिशा को राष्ट्रीय विकास विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप ओडिशा ने महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक निवेश, सेमीकंडक्टर निर्माण, कृषि सुधार, बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आज दो वर्ष पूरे होने पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ओडिशा देश के सबसे तेजी से उभरते विकास मॉडलों में से एक बनकर सामने आया है।

सुभद्रा योजना: महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

माझी सरकार की सबसे बड़ी पहचान बनी है सुभद्रा योजना। इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की महिलाओं को पांच वर्षों में ₹50,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 1.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को हजारों करोड़ रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

इस योजना ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम किया है। स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता को भी इससे नई गति मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुभद्रा योजना आने वाले वर्षों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

किसानों और ग्रामीण विकास को नई ऊर्जा

ओडिशा की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने मुख्यमंत्री किसान योजना और समृद्ध किसान पहल के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, ग्रामीण संपर्क सड़कों के निर्माण और कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देकर सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

गरीब कल्याण और आवास में रिकॉर्ड प्रदर्शन

प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में ओडिशा ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने अंत्योदय गृह योजना शुरू कर उन परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया है जो अन्य योजनाओं से वंचित रह गए थे।

गरीबों, अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों और वंचित वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासनिक तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाया गया है।

निवेश का नया केंद्र बना ओडिशा

माझी सरकार के दो वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक राज्य में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित करना रहा है।

जनवरी 2025 में आयोजित उत्कर्ष ओडिशा – मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव में राज्य को ₹16.7 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन निवेशों से लगभग 12.9 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है।

देश और दुनिया की प्रमुख कंपनियों ने ओडिशा में निवेश को लेकर अभूतपूर्व रुचि दिखाई है। यह दर्शाता है कि राज्य अब केवल खनिज संसाधनों के लिए नहीं, बल्कि निवेश और उद्योगों के लिए भी पहली पसंद बन रहा है।

अडानी समूह का ऐतिहासिक निवेश

अडानी समूह ने ओडिशा में अगले पांच वर्षों के दौरान लगभग ₹2.3 लाख करोड़ निवेश करने की घोषणा की है। यह निवेश ऊर्जा, सीमेंट, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स, एल्यूमीनियम, बंदरगाह और गैस वितरण जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।

यह निवेश न केवल राज्य की औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर भी पैदा करेगा।

जेएसडब्ल्यू और पॉस्को से औद्योगिक क्रांति

जेएसडब्ल्यू समूह ने केन्दुझर में अत्याधुनिक स्टील परियोजना के लिए ₹35,000 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त जेएसडब्ल्यू और दक्षिण कोरिया की POSCO के बीच प्रस्तावित साझेदारी के माध्यम से लगभग ₹65,000 करोड़ के विशाल इस्पात निवेश की संभावनाएं बन रही हैं।

यदि यह परियोजना पूरी तरह मूर्त रूप लेती है तो ओडिशा देश के सबसे बड़े इस्पात उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

सेमीकंडक्टर हब बनने की ओर ओडिशा

मोहन माझी सरकार ने ओडिशा को भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति से जोड़ने का ऐतिहासिक प्रयास किया है।

हाल ही में Intel और अमेरिकी कंपनी 3D Glass Solutions (3DGS) ने ओडिशा में लगभग 3.3 बिलियन डॉलर (करीब ₹28,000 करोड़) की सेमीकंडक्टर परियोजना के लिए समझौता किया है।

इसके अतिरिक्त RIR Power Electronics, SiCSem और अन्य कंपनियां राज्य में सेमीकंडक्टर तथा कंपाउंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाएं स्थापित कर रही हैं। इन परियोजनाओं से हजारों उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित होंगे और ओडिशा भारत के उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर मानचित्र पर प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास

सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निवेश किया है। नए मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

IIIT भुवनेश्वर में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य की भविष्य उन्मुख सोच को दर्शाती है।

सुशासन और जवाबदेही पर जोर

माझी सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं और जिलों तक जाकर विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

सरकार की कोशिश रही है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और शासन व्यवस्था अधिक संवेदनशील एवं जनोन्मुखी बने।

विकसित ओडिशा की ओर बढ़ते कदम

दो वर्षों का कार्यकाल किसी भी सरकार के लिए उसकी दिशा और प्राथमिकताओं का संकेत होता है। मोहन चरण माझी सरकार ने इन दो वर्षों में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि ओडिशा केवल प्राकृतिक संसाधनों का राज्य नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार, प्रौद्योगिकी और सुशासन का भी केंद्र बन सकता है।

सुभद्रा योजना से लेकर रिकॉर्ड निवेश, सेमीकंडक्टर परियोजनाओं से लेकर कृषि और ग्रामीण विकास तक, सरकार ने अनेक क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में ओडिशा आज एक ऐसे विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है जो समावेशी, निवेशोन्मुख और भविष्य केंद्रित है।

इन दो वर्षों की उपलब्धियां केवल एक सरकार का रिपोर्ट कार्ड नहीं, बल्कि एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध ओडिशा की नींव हैं।

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