ललित सुरजन की कलम से मोदी : हवा में तलवारबाजी
'राजनीति के अध्येताओं को स्मरण होगा कि कांग्रेस के एक प्रखर नेता वसंत साठे ने सत्तर के दशक में पहले-पहल राष्ट्रपति शासन प्रणाली की वकालत की थी।;
'राजनीति के अध्येताओं को स्मरण होगा कि कांग्रेस के एक प्रखर नेता वसंत साठे ने सत्तर के दशक में पहले-पहल राष्ट्रपति शासन प्रणाली की वकालत की थी। वे चूंकि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी माने जाते थे इसलिए एक शंका यह भी उठी थी कि कहीं स्वयं इंदिराजी तो ऐसा नहीं चाहतीं।
लेकिन आगे चलकर स्पष्ट हुआ कि साठेजी ने अपने ही कारणों से यह मुद्दा उठाया था। वे इसके लिए लगातार एक आंदोलन जैसा छेड़े रहे! किंतु इसमें उन्हें पार्टी के भीतर ही समर्थन प्राप्त नहीं हुआ और उस समय बात खत्म हो गई। इसके बाद भी देश में जब कभी चुनाव सुधार की बात उठी, उसके साथ अनिवार्य रूप से संसदीय बनाम राष्ट्रपति प्रणाली का मुद्दा भी उठा। इसे भी न तो आम जनता ने गंभीरता से लिया और न राजनीतिक दलों ने। यद्यपि चुनाव सुधार के अन्य बहुत से बिंदुओं पर यथोचित निर्णय लिए गए।'
'2014 के आम चुनाव के पहले एक बार फिर देश में राष्ट्रपति शासन प्रणाली लागू करने की कोशिश की जा रही है, प्रत्यक्ष नहीं तो प्रच्छन्न ही सही। इस उद्यम की पहल भाजपा के एक वर्ग ने की है और इसमें उसे उद्योग जगत, मीडिया तथा कथित विचार समूहों या थिंक टैंक्स के एक हिस्से का समर्थन मिल रहा है। लगभग दो साल पहले इस अभियान की शुरुआत हुई, अब धीरे-धीरे उसकी तस्वीर जनता के सामने खुल रही है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह समूचा अभियान गुजरात के विवादास्पद मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को केंद्र में रखकर संचालित किया जा रहा है।'
(देशबन्धु में 25 जुलाई 2013 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2013/07/blog-post_25.html