ललित सुरजन की कलम से वह अफसर कहाँ है?
'आज दुनिया एक ऐसे मुकाम पर आकर खड़ी है, जहां वैश्विक पूंजीवाद की ताकतें सर्वग्रासी, सर्वभक्षी होते जा रही हैं।
'आज दुनिया एक ऐसे मुकाम पर आकर खड़ी है, जहां वैश्विक पूंजीवाद की ताकतें सर्वग्रासी, सर्वभक्षी होते जा रही हैं। भ्रष्टाचार को संगठित, सांस्थानिक स्वरूप देने का काम इन्होंने किया है। एक तरफ इन्होंने मनुष्य के मन में असीमित इच्छाएं जागृत कर दी हैं, दूसरी ओर उन्हें हासिल करने के नए-नए रास्ते खोल दिए हैं। ये ताकतें देशों की सार्वभौमिकता का तिरस्कार करती हैं और राष्ट्रीय सरकारों की निर्णयक्षमता व न्यायबुद्धि में पलीता लगाती हैं। इसके लिए ये तरह-तरह के प्रलोभनों में नेताओं व अधिकारियों को उलझाती हैं।'
'यदि विश्व के मानचित्र पर निगाह डालें तो इनकी कुटिल चालों का कुछ अनुमान लगाया जा सकता है। वेनेजुएला में निकोलस मदूरो की निर्वाचित सरकार को अस्थिर करना ज्वलंत उदाहरण है। कभी विश्व में लोकप्रिय रहे ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति लुला आज जेल में हैं। ध्यान रहे कि वैश्विक पूंजी के एजेंट, समर्थक व अनुयायी हरेक देश में हैं। दुर्भाग्य यही है कि आज जो सत्तातंत्र के अंग हैं, वे इनके चक्रव्यूह में फंस जाते हैं।'
(देशबन्धु में 14 फरवरी 2019 को प्रकाशित)
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