ललित सुरजन की कलम से- यात्रा वृतांत : पूर्वोत्तर:कुछ और बातें

इस प्रदेश में अनेक जनजातियां निवास करती हैं, सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं, भाषा, भूषा, धार्मिक विश्वास, सामाजिक परंपराएं, हरेक दूसरे से बिल्कुल अलग।;

By :  DB Desk
Update: 2026-04-07 20:48 GMT

'एक समय असम प्रांत और पूर्वोत्तर भारत पर्यायवाची थे। इस प्रदेश में अनेक जनजातियां निवास करती हैं, सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं, भाषा, भूषा, धार्मिक विश्वास, सामाजिक परंपराएं, हरेक दूसरे से बिल्कुल अलग। इन जनजातियों की सामाजिक, सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण हो सके, वे स्वायत्त भाव से अपना सामाजिक जीवन जी सकें यह सोचकर इंदिरा गांधी के कार्यकाल में असम का विभाजन कर छह नए प्रांत बनाए गए। इन्हें अब सेवन सिस्टर्स या कि सात बहनों के नाम से जाना जाता है। सिक्किम के भारत में विलय के बाद सात की जगह आठ बहनें हैं। इसके बावजूद उतर-पूर्व के प्रांतों में किसी न किसी कारण से विग्रह बना रहता है। नगालैण्ड के राजनेता एक वृहत्तर नगालिम की स्थापना के लिए लगे हुए हैं। केन्द्र सरकार के साथ कई वर्षों से बातचीत चल रही है और कहते हैं कि कोई गुप्त समझौता भी हो चुका है। मणिपुर में कूकी, मैतेई और नगाओं के बीच हिंसक संघर्ष होते रहते हैं। मिजोरम में शांति, सद्भाव और प्रगति का माहौल स्थापित हो चुका है, लेकिन असम अभी भी विवादों से मुक्त नहीं है। त्रिपुरा में शांति है, किन्तु मेघालय में जातीय अस्मिताओं का सवाल बीच-बीच में सिर उठाता है। अरुणाचल की चीन के साथ सीमा को लेकर एक अलग तरह की उलझन है। सिक्कम में धार्मिक पुनरुत्थानवादी ताकतें सक्रिय दिखाई देती हैं।Ó

(देशबन्धु में 13 अप्रैल 2017 को प्रकाशित)

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