ललित सुरजन की कलम से - राजनीति के नए रंग
'जब भाजपा और पीडीपी में संयुक्त साझा सरकार बनने के एक हफ्ते के भीतर ही दरारें पडऩी शुरू हो गईं हैं तब इस बारे में तरह-तरह के कयास लगने लगे हैं
'जब भाजपा और पीडीपी में संयुक्त साझा सरकार बनने के एक हफ्ते के भीतर ही दरारें पडऩी शुरू हो गईं हैं तब इस बारे में तरह-तरह के कयास लगने लगे हैं। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले एक बुजुर्ग मित्र ने मुझसे कहा कि शायद मोदी सरकार जम्मू-काश्मीर का विभाजन करना चाहती है।
जम्मू में भाजपा की सरकार बन जाए और काश्मीर घाटी में पीडीपी की। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि आगे चलकर काश्मीर घाटी पाकिस्तान के हिस्से में न चली जाए। यह असंभव कल्पना नहीं है। ऐसे सुझाव समय-समय पर आ चुके हैं कि जम्मू, लद्दाख और काश्मीर अलग प्रांत बन जाएं; फिर देखा जाए कि क्या होता है।
मुफ्ती साहब ने मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद पाकिस्तान, हुर्रियत और अलगाववादियों को जो धन्यवाद दिया उससे भी वही ध्वनि निकलती है कि काश्मीर घाटी की अपनी एक स्वायत्त स्थिति है या होना चाहिए।'
(देशबन्धु में 12 मार्च 2015 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/03/blog-post_11.html