ललित सुरजन की कलम से दंतेवाड़ा रैली का संदेश
दंतेवाड़ा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और आदिवासी महासभा ने संयुक्त रूप से जिस रैली का आयोजन किया उसे ऐतिहासिक ही कहा जा सकता है।;
इस 14 नवंबर को दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और आदिवासी महासभा ने संयुक्त रूप से जिस रैली का आयोजन किया उसे ऐतिहासिक ही कहा जा सकता है। मीडिया की विभिन्न रिपोर्टों में बताया गया है कि रैली में 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए और रैली करीब 11 किमी लंबी थी। यह तथ्य अपने आप में महत्वपूर्ण है कि राज्य शासन ने रैली निकालने की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया था और तब हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के फैसले के बाद ही यह आयोजन संभव हो सका। इसके पहले दक्षिण बस्तर में किसी गैर शासकीय आयोजन में इतने लोग जुड़े हों यह याद नहीं पड़ता। बस्तर में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे माओवादी, उनके खिलाफ खड़ी भाजपा की राज्य सरकार और उसका श्रेय लेने को बेताब कर्मा-कांग्रेस, इन सबके लिए इस रैली ने संदेश दिया है कि बस्तर का आदिवासी समुदाय अपनी लड़ाई खुद अपने तरीके से लड़ना चाहता है और अब तक जो हो रहा है उसे वह किसी तरह बर्दाश्त ही कर रहा है। इस रैली के संदेश को समझने से ही बस्तर में शांति स्थापना का रास्ता खुल सकेगा।
(16 नवंबर 2006 का प्रकाशित)