ललित सुरजन की कलम से-अरब बसंत से अलेप्पो तक
'आज इजरायल की गणना विश्व के बड़े युद्ध सामग्री निर्यातक के रूप में की जाने लगी है जबकि हजारों सालों के वासी फिलीस्तीनियों को बेघर कर दिया गया है।
'आज इजरायल की गणना विश्व के बड़े युद्ध सामग्री निर्यातक के रूप में की जाने लगी है जबकि हजारों सालों के वासी फिलीस्तीनियों को बेघर कर दिया गया है। आज से दो हजार साल पहले यहूदियों को जिन भी कारणों से अपना वतन छोड़ अन्यत्र शरण लेना पड़ी हो, फिलीस्तीनियों ने भला कौन सा अपराध किया था जिसकी सजा उन्हें जलावतन कर दी जा रही है? एक तरफ विश्वग्राम का ढिंढोरा पीटा जाता है तो दूसरी ओर इजरायल में यहूदियों और फिलीस्तीनियों के बीच चीन की दीवार की तर्ज पर कांक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गई है। यह एक तस्वीर है। दूसरी तस्वीर में नवसाम्राज्यवादी ताकतों द्वारा अरब जगत पर थोपे गए युद्ध और गृहयुद्धों के दृश्य हैं। इन दारुण स्थितियों के पीछे क्या सोच काम कर रही है इसका खुलासा सेमुअल हंटिंगटन की बहुचर्चित पुस्तक द क्लैश ऑफ सिविलाइजेशन अर्थात सभ्यताओं के संघर्ष में मिलता है। इसका जिक्र मैं पहले भी अपने लेखों में कर चुका हूं। अगर इस पुस्तक को नवसाम्राज्यवादियों का धर्मग्रंथ भी कहा जाए तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी।'
(देशबन्धु में 22 दिसम्बर 2016 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/12/blog-post_24.हटम्ल