ललित सुरजन की कलम से भ्रष्टाचार तो आज़ादी के पहले से है

अरेबियन नाइट्स याने सहस्र रजनीचरित अथवा कथा सरित्सागर की तर्ज पर हर दिन एक नया किस्सा सुनाया जा रहा है ।;

Update: 2026-05-24 22:00 GMT

'एक साल पूरा हो गया है और भ्रष्टाचार के किस्से हैं कि रुकने का नाम ही नहीं लेते। अरेबियन नाइट्स याने सहस्र रजनीचरित अथवा कथा सरित्सागर की तर्ज पर हर दिन एक नया किस्सा सुनाया जा रहा है । सवाल उठता है कि ऐसा माहौल क्योंकर बन रहा है। क्या इसके पीछे कारपोरेट घरानों की चालबाजी है कि ऊपर सत्ता और पूंजी का गठबंधन बदस्तूर चलता रहे, लेकिन नीचे उन्हें कोई तकलीफ न हो। कहीं यह भ्रष्टाचार के मुद्दे को केंद्र में रख अन्य ज्वलन्त प्रश्नों से बचने की साजिश तो नहीं है, यह दूसरा प्रश्न भी मन में आता है। जो भी हो, यह आशंका उपजती है कि इसके चलते देश कहाँ जाएगा! यह तो गनीमत है कि आम जनता का विश्वास लोकतंत्र पर अभी तक बना हुआ है। मुखर उच्चवर्ग और मध्यवर्ग चाहे जितनी लानतें फेंकें, आम आदमी अपने वोट का इस्तेमाल लगातार बढ़ते हुए उत्साह के साथ कर रहा है। चिंता इस बात की है कि इस उत्साह को तोड़ने के लिए जो ताकतें बड़े जोर-शोर के साथ लगी हैं, वे कहीं कामयाब न हो पाएं।'

(१७ मई २०१२ को देशबन्धु में प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/05/17.html

Tags:    

Similar News