बारिश में बीमारियों से बचाव: ऋतुचर्या के हिसाब से बदलें खान-पान और दिनचर्या
नई दिल्ली, वर्षा ऋतु का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इसी समय शरीर के अंदर कई बदलाव भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में पाचन शक्ति, यानी जठराग्नि, थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए जो भी हम खाते-पीते हैं उसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।

नई दिल्ली, वर्षा ऋतु का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इसी समय शरीर के अंदर कई बदलाव भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में पाचन शक्ति, यानी जठराग्नि, थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए जो भी हम खाते-पीते हैं उसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसी वजह से ऋतुचर्या का पालन करना बहुत जरूरी माना गया है, ताकि शरीर संतुलित और रोगों से सुरक्षित रह सके।
आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इस मौसम में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे अच्छा होता है। भारी, तला-भुना और बासी खाना पाचन को और कमजोर कर सकता है। बरसात में नमी और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए बाहर का या खुला हुआ खाना खाने से बचना चाहिए। घर का बना सादा भोजन, जैसे मूंग दाल, उबली हुई सब्जियां और हल्के मसालों वाला खाना शरीर के लिए बेहतर माना जाता है।
आयुर्वेद यह भी कहता है कि इस मौसम में खट्टा और नमकीन स्वाद सीमित मात्रा में लेना चाहिए। वहीं, दूध और दही जैसी चीजों का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि ये कफ को बढ़ा सकती हैं और जुकाम या भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ा सकती हैं।
पानी पीने के तरीके में भी बदलाव जरूरी है। इस मौसम में उबला हुआ या हल्का गुनगुना पानी पीना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। सुबह की शुरुआत अगर गुनगुने पानी में थोड़ा शहद मिलाकर की जाए तो यह शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन को सुधारने में मदद करता है।
वर्षा ऋतु में योग और हल्का व्यायाम भी बहुत लाभदायक होता है। इससे शरीर सक्रिय रहता है और जठराग्नि संतुलित बनी रहती है। वज्रासन, त्रिकोणासन, सेतुबंधासन और पादहस्तासन जैसे आसान योगासन इस मौसम में विशेष रूप से उपयोगी माने जाते हैं।
इसके साथ ही साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है, क्योंकि इस मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ताजे फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर ही खानी चाहिए।


