Top
Begin typing your search above and press return to search.

पश्चिमोत्तानासन के बाद करें ये दो आसन

नई दिल्ली, योग अभ्यास का मूल सिद्धांत केवल आसनों को करना ही नहीं बल्कि, उनके उचित क्रम और संतुलन को बनाए रखना है। उत्थित पश्चिमोत्तानासन शरीर के पिछले हिस्से में गहरा खिंचाव लाता है और पेट की मांसपेशियों को एक्टिव करता है। इस आसन के बाद शरीर को आराम देने के लिए मकरासन और भुजंगासन करना जरूरी है।

पश्चिमोत्तानासन के बाद करें ये दो आसन
X

नई दिल्ली, योग अभ्यास का मूल सिद्धांत केवल आसनों को करना ही नहीं बल्कि, उनके उचित क्रम और संतुलन को बनाए रखना है। उत्थित पश्चिमोत्तानासन शरीर के पिछले हिस्से में गहरा खिंचाव लाता है और पेट की मांसपेशियों को एक्टिव करता है। इस आसन के बाद शरीर को आराम देने के लिए मकरासन और भुजंगासन करना जरूरी है।

मकरासन शरीर को तुरंत शिथिलता और विश्राम देता है, वहीं भुजंगासन रीढ़ को मजबूती और लचीलापन प्रदान करता है।

मकरासन- योगाभ्यास में उत्थित पश्चिमोत्तानासन (एक तीव्र आगे की ओर झुकने और संतुलन बनाने वाला आसन है) के बाद मकरासन (पेट के बल लेटकर आराम करने वाला आसन) करना रीढ़ की हड्डी के संतुलन, मांसपेशियों की रिकवरी और तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, उत्थित या निरालम्ब पश्चिमोत्तानासन के बाद मकरासन का अभ्यास मुख्य रूप से एक काउंटर-पोज और शिथिलीकरण के रूप में किया जाता है, जब आप शरीर को एक दिशा में गहराई से मोड़ते हैं, तो उसके विपरीत दिशा में किया जाने वाला आसन शरीर को वापस सामान्य स्थिति में लाता है।

उत्थित पश्चिमोत्तानासन में रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों पर आगे की तरफ एक गहरा और तीव्र खिंचाव आता है। इसके ठीक बाद मकरासन करने से आराम मिलता है, जिससे रीढ़ की हड्डी की प्राकृतिक संरचना संतुलित बनी रहती है और उसकी जकड़न दूर होती है।

भुजंगासन - उत्थित पश्चिमोत्तानासन एक तीव्र फॉरवर्ड बेंड (आगे की ओर झुकने वाला आसन) है, जिसमें रीढ़ की हड्डी आगे की ओर पूरी तरह खिंचती है। भुजंगासन एक बैकबेंड (पीछे झुकने वाला आसन) है। जब अभ्यासकर्ता आगे झुकने के बाद पीछे झुकते हैं, तो रीढ़ की हड्डी के जोड़ों और मांसपेशियों पर पड़ा दबाव तुरंत दूर हो जाता है और वह अपनी प्राकृतिक स्थिति में वापस आ जाती है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्थित पश्चिमोत्तानासन करने से पेट के अंगों पर दबाव बनता है, जिससे पाचन अग्नि तीव्र होती है। भुजंगासन उसी दबाव को विपरीत खिंचाव देकर पेट के अंगों (जैसे लिवर, किडनी और आंतों) की टोनिंग पूरी करता है। इससे कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में दोगुना लाभ मिलता है।

अगर अभ्यासकर्ता लगातार आगे झुकने वाले आसन ही करते रहेंगे और उसके काउंटर (पीछे झुकने वाले) आसन नहीं करेंगे, तो रीढ़ की हड्डी के जोड़ों पर गलत दबाव पड़ सकता है। भुजंगासन और मकरासन का यह क्रम आपकी पीठ के निचले हिस्से को सुरक्षित रखता है।

शुरुआती अभ्यासकर्ता इस आसन को करने से पहली किसी विशेषज्ञ की देख-रेख पर ही करें।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it