तिब्‍बत के साथ-साथ पाक‍िस्‍तान, अफगान‍िस्‍तान और चीन में भी भूकंप के झटके

नई द‍िल्‍ली, कई देशों में शुक्रवार की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के मुताब‍िक, तिब्‍बत के साथ-साथ पाक‍िस्‍तान, अफगान‍िस्‍तान और चीन में भी शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस क‍िए गए।;

By :  IANS
Update: 2026-10-23 06:25 GMT

नई द‍िल्‍ली, कई देशों में शुक्रवार की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के मुताब‍िक, तिब्‍बत के साथ-साथ पाक‍िस्‍तान, अफगान‍िस्‍तान और चीन में भी शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस क‍िए गए। एक द‍िन पहले गुरुवार रात को 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने त‍िब्‍बत में भारी तबाही मचाई, ज‍िसमें 16 लोगों की मौत हो गई और करीब 32 लोग घायल हुए।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, शुक्रवार सुबह भी तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस क‍िए गए। एक द‍िन पहले गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 म‍िनट पर एक बार फ‍िर धरती कांप उठी। र‍िक्‍टर स्‍केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 15 क‍िलोमीटर की गहराई पर था।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के मुताब‍िक, पाकिस्तान में सुबह 4:56 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 28.919 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 64.678 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। इसकी गहराई 15 किलोमीटर रही।

वहीं, अफगानिस्तान में सुबह 5:54 बजे 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र 35.138 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 69.442 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। भूकंप की गहराई 25 किलोमीटर दर्ज की गई।

इसके अलावा, चीन में सुबह 6:05 बजे 4.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस क‍िए गए। एनसीएस के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 32.542 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.835 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। भूकंप की गहराई 15 किलोमीटर दर्ज की गई।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, एक द‍िन पहले गुरुवार रात 8:03 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 थी। इसका केंद्र धरती की सतह से 173 किलोमीटर गहराई में था।

इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था। भूकंप के कारण 300 से अधिक घर ढह गए। भूकंप से हुए नुकसान का आकलन अभी भी किया जा रहा है। राहत कार्य तेजी से चल रहा है और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा सकती हैं।

Tags:    

Similar News