जंगली जानवर भी कॉर्पोरेट घरानों की मूंछ से बच नहीं सकते : असम कांग्रेस

असम में विपक्षी कांग्रेस ने शनिवार को असम राज्य चिड़ियाघर से दो काले पैंथर्स को गुजरात के एक निजी चिड़ियाघर में भेजे जाने की कड़ी निंदा की

Update: 2021-02-14 00:47 GMT

गुवाहाटी। असम में विपक्षी कांग्रेस ने शनिवार को असम राज्य चिड़ियाघर से दो काले पैंथर्स को गुजरात के एक निजी चिड़ियाघर में भेजे जाने की कड़ी निंदा की। गुवाहाटी चिड़ियाघर के अधिकारियों के मुताबिक, असम देश में ब्लैक पैंथर्स का एकमात्र ब्रीडिंग सेंटर है। गुवाहाटी में असम राज्य चिड़ियाघर-सह-बॉटेनिकल गार्डन को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की मंजूरी से दो काले पैंथर्स के बदले में इजराइल से चार जेब्रा हासिल करने में मदद की जाएगी।

फरवरी, 2019 में सीजेडए द्वारा अनुमोदित ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन किंगडम रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्व में है।

असम कांग्रेस की प्रवक्ता बोब्बीता शर्मा ने कहा, "ऐसा लगता है कि चिड़ियाघरों में कैद में रखे गए जंगली जानवर भी बड़े कॉर्पोरेट घरानों की मूंछ से बच नहीं सकते, क्योंकि हाल ही में गुवाहाटी के राज्य चिड़ियाघर से दो काले पैंथर्स रिलायंस समूह द्वारा स्थापित किए जा रहे गुजरात के एक चिड़ियाघर में भेज दिए गए हैं।"

उन्होंने कहा कि एक साल पहले असम से तीन हाथियों को गुजरात के एक मंदिर परिसर में रखने के लिए भेज दिए जाने पर काफी हो-हल्ला हुआ था। इसके बावजूद, असम राज्य चिड़ियाघर से दो काले पैंथरों को जामनगर चिड़ियाघर में भेज दिया गया।

उन्होंने कहा, जामनगर चिड़ियाघर का संचालन मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के जिम्मे है। जनवरी के दूसरे हफ्ते में गुप्त तरीके से दो ब्लैक पैंथर गुजराज भेज दिए गए। असम के पशु प्रेमियों और संरक्षणवादियों को जानकारी तक नहीं दी गई।

बोब्बीता शर्मा असम कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने दावा किया कि यह हस्तांतरण एक विनिमय कार्यक्रम के हिस्से के रूप में किया गया था जिसके तहत जामनगर केंद्र असम को इजराइल से चार जेब्रा हासिल करने में मदद करेगा। उनके द्वारा जारी दस्तावेज में ऐसे किसी भी आदान-प्रदान का उल्लेख मगर नहीं किया गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि असम के पीसीसीएफ (वन्यजीव) को संबोधित पत्र में जानवरों के आदान-प्रदान का कोई जिक्र नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि इस डील में सरकारी प्रक्रिया का पालन क्या किया गया? क्या इस तरह के स्थानांतरण प्रदर्शन के लिए हो सकते हैं? महामारी के दौरान गुपचुप तरीके से ऐसा कोई क्यों किया गया?

उन्होंने कहा कि यह कहे बिना रहा नहीं जाता कि रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा हाल ही में बड़ी संख्या में कंपनियों के अधिग्रहण और टेलीकॉम और एंटरटेनमेंट से लेकर रिटेल मार्केटिंग तक हर कारोबार में उसकी एंट्री के बाद अब जंगली जानवर भी इसके चंगुल से सुरक्षित नहीं हैं।

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