बीएचयू, IIT और IUCTE में 200 से अधिक नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच शुरू, पीएमओ के निर्देश पर वाराणसी पहुंचीं विजिलेंस और आईबी की टीमें

जांच एजेंसियां इन नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितता और पैसों के लेन-देन के आरोपों की पड़ताल कर रही हैं। विजिलेंस टीम भर्ती प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों और नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है, जबकि आईबी की टीम मनी ट्रेल और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कर रही है।

Update: 2026-03-07 11:06 GMT
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), आईआईटी-बीएचयू और अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में वर्ष 2022 से 2024 के बीच हुई 200 से अधिक नियुक्तियों को लेकर उच्च स्तरीय जांच शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की सख्ती के बाद शनिवार को विजिलेंस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की दो अलग-अलग टीमें वाराणसी पहुंचीं और केंद्रीय कार्यालय में भर्ती से जुड़ी अहम फाइलें तलब कीं। जांच एजेंसियां इन नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितता और पैसों के लेन-देन के आरोपों की पड़ताल कर रही हैं। विजिलेंस टीम भर्ती प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों और नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है, जबकि आईबी की टीम मनी ट्रेल और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कर रही है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत आजमगढ़ के अभिषेक सिंह की ओर से की गई शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और कुछ पदों के लिए पैसे लेकर चयन किया गया है। प्राथमिक जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। कुछ मामलों में यह पाया गया कि लिखित परीक्षा और परिणाम एक ही दिन घोषित कर दिए गए। इतना ही नहीं, उसी दिन बिना किसी अंतराल के चयन की अगली प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की प्रक्रिया से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और भर्ती में अनियमितता की आशंका बढ़ जाती है।

ये भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान नॉन-टीचिंग स्टाफ और नर्सिंग सहायक के पदों पर हुई कुछ नियुक्तियों को विशेष रूप से संदेह के दायरे में रखा गया है। इन पदों पर राजस्थान और केरल के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को लेकर भी जांच की जा रही है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन नियुक्तियों में 12 से 15 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई थी। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसियों को कथित मनी ट्रेल से जुड़े कुछ साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

संदिग्ध मोबाइल नंबर सर्विलांस पर

जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े 12 संदिग्ध मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया है। इनमें से तीन नंबरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आईआईटी-बीएचयू में भी बढ़ा जांच का दायरा

आईआईटी-बीएचयू में भर्ती से जुड़े मामलों की जांच भी तेज हो गई है। जांच का फोकस एक ऐसे प्रोफेसर पर केंद्रित हो गया है, जिन्हें पूर्व निदेशक प्रो. पी.के. जैन का करीबी माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, प्रो. पी.के. जैन के कार्यकाल के दौरान यह प्रोफेसर भर्ती प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि उस अवधि में 80 से अधिक नियुक्तियां की गई थीं। इनमें से कई मामलों में भर्ती मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगे हैं।

टाइपिंग न आने वाले अभ्यर्थियों को मिला क्लर्क पद

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। कुछ मामलों में क्लर्क पदों पर ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिन्हें टाइपिंग तक नहीं आती थी। भर्ती प्रक्रिया में इस तरह की कथित लापरवाही और नियमों की अनदेखी से भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी हो गई है। जांच एजेंसियां अब इन नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया का विस्तार से परीक्षण कर रही हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन का बयान

बीएचयू के रजिस्ट्रार प्रो. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मंत्रालय के निर्देश पर जांच टीमें वाराणसी पहुंची हैं और विभिन्न विभागों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर से जुड़ी नियुक्तियों की भी जांच की जा रही है। वहीं आईआईटी-बीएचयू के रजिस्ट्रार सुमित कुमार विश्वास ने कहा कि उन्हें फिलहाल भर्ती से संबंधित किसी जांच के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

जांच के नतीजों पर टिकी नजर

भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई इस उच्च स्तरीय जांच पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो विश्वविद्यालय से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही संदिग्ध नियुक्तियों को रद्द किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल विजिलेंस और आईबी की टीमें दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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