चंडीगढ़: लगभग दो दशक पुराने चर्चित रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया है। हालांकि इस केस में दोषी ठहराए गए अन्य तीन आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को अदालत ने बरकरार रखा है।
इस मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने वर्ष 2019 में गुरमीत राम रहीम समेत चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फैसले के खिलाफ राम रहीम ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अब हाईकोर्ट ने उस अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें इस मामले में राहत देते हुए बरी कर दिया है, जबकि बाकी तीन दोषियों की सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि गुरमीत राम रहीम फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएंगे, क्योंकि वे दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं और रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।
क्या है रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड
यह मामला हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है। रामचंद्र छत्रपति स्थानीय समाचार पत्र “पूरा सच” के संपादक थे। उन्होंने अगस्त 2002 में एक अज्ञात पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें डेरा सच्चा सौदा के भीतर साध्वियों के साथ कथित यौन शोषण और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पत्र के प्रकाशित होने के बाद मामला बेहद चर्चित हो गया था। इसी के कुछ समय बाद 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा में उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल छत्रपति को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन लगभग एक महीने बाद 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपी गई जांच
शुरुआत में मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की। वर्ष 2003 में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद नवंबर 2003 में सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान डेरा सच्चा सौदा की ओर से इस जांच को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया और सीबीआई जांच जारी रही।
16 साल चली सुनवाई, 2019 में आया फैसला
इस मामले की सुनवाई पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में करीब 16 वर्षों तक चली। लंबी जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई ने 2018-2019 के दौरान अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई अदालत ने मामले को सुनियोजित साजिश करार देते हुए डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद चारों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
अपील पर हाईकोर्ट का फैसला
सीबीआई अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए गुरमीत राम रहीम ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस अपील पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया है। हालांकि अदालत ने अन्य तीन दोषियों की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी उम्रकैद की सजा में कोई राहत नहीं दी। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि यह पत्रकार की हत्या और डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादों के कारण लंबे समय तक सुर्खियों में रहा था।