योगी आदित्यनाथ बोले- रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले माफी मांगकर आएं अयोध्या

मुख्यमंत्री के अयोध्या पहुंचने से करीब एक घंटे पहले समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को राम मंदिर दर्शन के लिए आने की घोषणा की थी। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच योगी आदित्यनाथ का बयान काफी अहम माना जा रहा है।;

Update: 2026-11-08 09:15 GMT

अयोध्या : दसवें दीपोत्सव समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की सरकार में रामभक्तों पर गोलियां चलवाई गईं और संतों पर लाठीचार्ज कराया गया, उनका अयोध्या में स्वागत है, लेकिन उन्हें यहां आने से पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अतीत में अयोध्या का अपमान करने वालों को अपने कृत्यों पर पश्चाताप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सभी को क्षमा करते हैं, लेकिन अहंकारी सत्ता को समाप्त करने में उन्हें देर नहीं लगती। मुख्यमंत्री रामकथा पार्क में आयोजित समारोह में भगवान श्रीराम के स्वरूप का राज्याभिषेक करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उनके भाषण में धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति और अयोध्या के पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख रहा। उनके निशाने पर मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार और उसका कार्यकाल रहा।

'पहले रामभक्तों और संतों से मांगें माफी'

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या की गलियों को रक्तरंजित किया, वे आज अपने पुराने कृत्यों को याद तक नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलवाने और संतों पर लाठीचार्ज कराने वालों को अपने अतीत का जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान को सपा नेतृत्व पर सीधा राजनीतिक प्रहार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को रामभक्तों और संतों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान रामकथा पार्क में मौजूद साधु-संतों और अयोध्यावासियों ने जय श्रीराम के नारे लगाकर समर्थन जताया।

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की घोषणा के बीच बयान

मुख्यमंत्री के अयोध्या पहुंचने से करीब एक घंटे पहले समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को राम मंदिर दर्शन के लिए आने की घोषणा की थी। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच योगी आदित्यनाथ का बयान काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अखिलेश यादव का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके निशाने पर सपा की पिछली सरकार और अयोध्या से जुड़े उसके फैसले रहे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताया था, आज उनका अयोध्या आना भी एक तरह से वैचारिक बदलाव और विजय का संकेत है।

पुरानी अयोध्या से नई रामनगरी तक का जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में अयोध्या के पुराने हालात और वर्तमान में हो रहे विकास कार्यों की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि एक समय रामनगरी उपेक्षा और अव्यवस्था का सामना कर रही थी, लेकिन अब यहां विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। अयोध्या की पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं से भी मजबूत हो रही है। योगी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में सभी को अपनाया और समाज को मर्यादा का संदेश दिया। लेकिन उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि कोई मारीच का रूप धारण कर आएगा तो वह राम के बाणों से बच नहीं पाएगा। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कहा कि आस्था और मर्यादा के साथ खिलवाड़ करने वालों को परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

'अब अयोध्या में कभी कर्फ्यू नहीं लगेगा'

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अब रामनगरी में कभी कर्फ्यू नहीं लगेगा। यहां कोई दंगा-फसाद करने का साहस नहीं कर पाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अयोध्या को दोबारा उपेक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा और न ही संतों का अपमान या रामभक्तों पर गोली चलाने जैसी घटनाएं दोहराई जाएंगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या की धार्मिक पहचान, संतों का सम्मान और रामभक्तों की आस्था सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। दसवें दीपोत्सव के मंच से दिया गया उनका यह संदेश धार्मिक आयोजन के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। एक ओर उन्होंने अयोध्या के विकास और सुरक्षा को सरकार की उपलब्धि के रूप में पेश किया, वहीं दूसरी ओर सपा के पुराने शासनकाल को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।

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