Diwali 2026: दीवाली पर कब है लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त? कैसे करें पूजा

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कार्तिक अमावस्या रविवार सुबह 10:57 बजे प्रारंभ होकर सोमवार नौ नवंबर को सुबह 11:32 बजे तक रहेगी। काशी के ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दीपावली के लिए प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है।;

Update: 2026-11-08 06:28 GMT

काशी: Diwali 2026: प्रकाश, उल्लास और सुख-समृद्धि का पर्व दीपावली रविवार को कार्तिक अमावस्या के प्रदोष काल में मनाया जाएगा। घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीपों की रोशनी के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। काशी के विद्वानों के अनुसार, इस बार अमावस्या तिथि दो दिन तक रहने के बावजूद प्रदोष काल में तिथि की उपलब्धता के कारण आठ नवंबर को दीपावली मनाना शास्त्रसम्मत है। पर्व को लेकर घरों और बाजारों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शाम होते ही दीपों, झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से वातावरण जगमगाएगा।

अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का विशेष संयोग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कार्तिक अमावस्या रविवार सुबह 10:57 बजे प्रारंभ होकर सोमवार नौ नवंबर को सुबह 11:32 बजे तक रहेगी। काशी के ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दीपावली के लिए प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार रविवार को प्रदोष काल में अमावस्या मिलने के कारण दीपावली आठ नवंबर को मनाई जाएगी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के आचार्य डा. सुभाष पांडेय ने बताया कि सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इस बार प्रदोष काल शाम 5:13 बजे से 7:39 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि लगभग दो घंटे 26 मिनट की होगी। इसी दौरान श्रद्धालु घरों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्ज्वलित कर विधि-विधान से पूजा कर सकेंगे।

स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन रहेगा विशेष फलदायी

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि दीपावली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु पूजा के लिए नई प्रतिमाओं की स्थापना कर सकते हैं। घर में नियमित पूजन के लिए धातु की प्रतिमा रखना भी उत्तम माना जाता है। पूजन के दौरान कलश स्थापना कर मां महालक्ष्मी का आह्वान करना चाहिए। इसके बाद श्रीसूक्त का पाठ करते हुए कमल पुष्प, कुमकुम, इत्र और खील-बताशे अर्पित किए जा सकते हैं। भगवान कुबेर की पूजा धन-धान्य और समृद्धि की कामना के साथ की जाती है। कुबेर पूजन के लिए यह मंत्र बताया गया है-'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।'

वृष लग्न में पूजा के लिए मिलेगा विशेष मुहूर्त

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष और ख्यात ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय के अनुसार, दीपावली पर लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में स्थिर लग्न के दौरान करना विशेष शुभ माना जाता है। इस बार वृष लग्न शाम 5:46 बजे से 7:42 बजे तक रहेगा। लगभग एक घंटे 56 मिनट का यह समय घरों और प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम बताया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, स्थिर लग्न में पूजा करने से सुख-समृद्धि और स्थायित्व की कामना की जाती है। व्यापारी वर्ग भी इस मुहूर्त में अपने प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर नए कार्यों तथा आर्थिक उन्नति के लिए प्रार्थना करेगा।

निशीथ काल में मां काली की पूजा

दीपावली के अवसर पर बंग समुदाय में निशीथ काल के दौरान मां काली की पूजा करने की परंपरा है। इस पूजा में श्रद्धालु मां काली का आह्वान कर सुख, समृद्धि, कल्याण और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सोमवार को दोपहर में कुंभ स्थिर लग्न दोपहर 1:10 बजे से 2:41 बजे तक रहेगा। वहीं, निशीथ काल में सिंह स्थिर लग्न रात 12:14 बजे से 2:28 बजे तक प्राप्त होगा। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालु निर्धारित विधि के अनुसार अनुष्ठान कर सकते हैं।

दीपों से जगमगाएंगे घर और मंदिर

दीपावली पर घरों के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थलों को दीपों से सजाया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजन और दीप प्रज्ज्वलन होगा। श्रद्धालु मां लक्ष्मी से परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि की कामना करेंगे। काशी में दीपावली के अवसर पर धार्मिक उत्साह और उल्लास का वातावरण रहेगा। दीपों की रोशनी के बीच श्रद्धालु भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन कर पर्व मनाएंगे।

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