यूपी के विकास में नया अध्याय बनेगी शहरी पुनर्विकास नीति-2026

उत्तर प्रदेश शासन ने पुरानी और जीर्ण-शीर्ण इमारतों को आधुनिक, सुरक्षित एवं स्मार्ट बुनियादी ढांचे में बदलने के लिए विगत फरवरी माह में ही उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति, 2026 जारी की है;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-07-18 16:13 GMT
  • ज़िया चैधरी

25 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी इमारतों को राहत देने की कवायद

  • 1500 वर्ग मी. से अधिक क्षेत्रफल की योजनाएं होेंगी पात्र
  • रोजगार बढ़ेगा, रहने के लिए मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

मेरठ। उत्तर प्रदेश शासन ने पुरानी और जीर्ण-शीर्ण इमारतों को आधुनिक, सुरक्षित एवं स्मार्ट बुनियादी ढांचे में बदलने के लिए विगत फरवरी माह में ही उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति, 2026 जारी की है। प्रमुख सचिव पी0 गुरु प्रसाद द्वारा जारी इस नीति का उद्देश्य शहरी क्षय को रोकना, भूमि का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना और आर्थिक विकास को गति देना है।

बता दें कि न्यूनतम 25 वर्ष पुरानी आवासीय योजनाएं, हाउसिंग सोसायटी/अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन और 1500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली योजनाएं पुनर्विकास के लिए पात्र होंगी। औद्योगिक इकाइयों (बंद या प्रदूषण फैलाने वाली) को भी पुनर्विकास की अनुमति मिल सकेगी। नीति में समयबद्ध क्रियान्वयन, विधिक अनुमोदन, स्टांप ड्यूटी में छूट और संचालन-रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है। आवास बंधु को राज्य स्तर पर नोडल एजेंसी बनाया गया है। शासन का मानना है कि इस नीति से शहरों के पुराने क्षेत्रों का कायाकल्प होगा, रोजगार बढ़ेगा और बेहतर रहन-सहन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह नीति उत्तर प्रदेश के शहरी विकास में एक नया अध्याय साबित होगी। इस नीति में एकल भवनों, लीज पर दी गई सरकारी भूमि (फ्रीहोल्ड में परिवर्तन न होने पर) और हेरिटेज जोन को पात्रता में शामिल नहीं किया गया है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर उपाध्यक्षों, विकास प्राधिकरणों, आवास आयुक्त, नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र को पत्र जारी किया गया है जो समस्त विभागों की वेबसाईट पर भी उपलब्ध है।

कहां कहां होगा नीति का असर

शहरी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विस्तार के बावजूद पुराने भवन जीर्ण-शीर्ण हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में भूमि की ऊंची कीमत होने के बावजूद अंडरयूटिलाइजेशन की समस्या है। नीति इन क्षेत्रों को पुनर्विकसित कर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने, बेहतर आवास और अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है। पुरानी योजनाओं के निवासियों को आधुनिक सुविधाओं वाला सुरक्षित आवास मिलेगा और शहरों का विकास संतुलित रूप से होगा। यह नीति लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा समेत सभी नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में लागू होगी।

क्रियान्वयन के लिए बनाए गए हैं तीन मॉडल

  • शासकीय अभिकरण द्वारा सीधे क्रियान्वयन
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) या निजी विकासकर्ता के माध्यम से
  • हाउसिंग सोसायटी-अपार्टमेंट एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास

ये हैं नीति के प्रावधान

  • पुनर्विकास के लिए हाउसिंग सोसायटी के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति अनिवार्य।
  • डीपीआर तैयार करने, ट्रांजिट आवास, किराए की व्यवस्था और तीन वर्ष में कार्य पूरा करने का लक्ष्य।
  • लाभार्थियों को मूल स्थान के आस-पास ही नए फ्लैट आवंटित किए जाएंगे।
  • विकास शुल्क में 50 प्रतिशत छूट, अतिरिक्त 1.0 एफएआर भी निःशुल्क, ईडब्ल्यूएस/एलआईजी कोटा से छूट जैसी कई प्रकार की छूट दी गई हैं।

इंसेंटिव्स भी देगा राहत

  • विकास शुल्क में 50 प्रतिशत छूट
  • भूमि उपयोग परिवर्तन में 25 प्रतिशत छूट
  • बेसिक एफएआर के अतिरिक्त 1.0 एफएआर फ्री
  • 5 प्रतिशत अतिरिक्त व्यावसायिक क्षेत्रफल
  • ईडब्ल्यूएस/एलआईजी कोटा से छूट
  • स्टांप ड्यूटी में भी राहत

पुननिर्माण के लिए कैटेगरी के अनुसार रखी गई है समय सीमा

  • स्थल खाली कराने के लिए 60 दिन
  • निर्माण शुरू करने के लिए 12 माह
  • पूरा करने के लिए 3 वर्ष (अधिकतम 2 वर्ष विस्तार)
  • ट्रांजिट आवास निःशुल्क या किराया दिया जाएगा।
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