राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: टिन्नू यादव और मनीष यादव 39 घंटे की पुलिस रिमांड पर, कई ठिकानों पर होगी पूछताछ

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले में मुख्य आरोपी टिन्नू यादव और मनीष यादव 39 घंटे की पुलिस रिमांड पर। एसआईटी नकदी, आभूषण, दस्तावेज और कथित निवेश की जांच करते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी।;

Update: 2026-07-18 10:46 GMT
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले की जांच निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मामले के मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव को शनिवार सुबह 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया। सुबह करीब 8:40 बजे दोनों आरोपियों को जिला कारागार से पुलिस लाइन स्थित अस्पताल लाया गया, जहां मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने पूछताछ के लिए एसओजी कार्यालय पहुंचाया। इस दौरान टिन्नू यादव मीडिया और लोगों की नजरों से बचने के लिए पूरे समय गमछे से अपना चेहरा ढके रहा।

संदिग्ध ठिकानों पर ले जा सकती है पुलिस टीम

पुलिस अधिकारियों के अनुसार रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों को उन स्थानों पर भी ले जाया जा सकता है, जहां कथित तौर पर मंदिर में चढ़ाए गए दान की रकम का बंटवारा किया जाता था। जांच एजेंसियां उन संपत्तियों और ठिकानों की भी पड़ताल करेंगी, जहां कथित रूप से चढ़ावे की रकम निवेश की गई। इनमें रियल एस्टेट परियोजनाएं, निर्माण कार्य, मकान, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं।

जांच का मुख्य उद्देश्य मामले से जुड़े नकदी, आभूषण, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी करना है, ताकि धन के लेनदेन और उसके उपयोग का पूरा ब्यौरा सामने आ सके।

पहले की पूछताछ में मिले अहम सुराग

इससे पहले तीन चरणों की पुलिस कस्टडी के दौरान छह आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियों को इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, आभूषण और दो चारपहिया वाहन भी बरामद हुए थे। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

अधिकारियों का मानना है कि टिन्नू यादव और मनीष यादव से पूछताछ इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकती है, क्योंकि दोनों पर चढ़ावे की रकम के प्रबंधन और कथित गड़बड़ियों में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप है।

दानपेटिका की चाबी को लेकर भी जांच तेज

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मंदिर की दानपेटिका (हुंडी) की चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी। इसी तथ्य को आधार बनाकर पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे की राशि का संग्रह, रखरखाव और वितरण किस प्रक्रिया के तहत होता था तथा उसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित रूप से गबन की गई राशि का उपयोग किन परियोजनाओं या संपत्तियों में किया गया और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता है।

पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश

पुलिस का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान प्राप्त जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि पूछताछ में नए नाम या वित्तीय लेनदेन सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्य आरोपियों से पूछताछ के बाद चढ़ावे की कथित हेराफेरी, धन के प्रवाह और पूरे नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे।

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