एसटीएफ का एक्शन: चीनी नागरिक समेत तीन गिरफ्तार, शेल कंपनियों के जरिए हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाला और शेल कंपनी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक चीनी नागरिक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह भारत में फर्जी कंपनियां बनाकर हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।;

Update: 2026-07-23 15:48 GMT

नोएडा। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाला और शेल कंपनी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक चीनी नागरिक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह भारत में फर्जी कंपनियां बनाकर हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

गिरफ्तार मुख्य आरोपी चीनी नागरिक लियो लॉन्गुई पिछले कई वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहा था और नोएडा स्थित वाईटीएल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का संचालन कर रहा था।

एसटीएफ ने बताया है कि, 22 जुलाई की रात लगभग 10 बजे नोएडा के सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी सोसाइटी से मुख्य आरोपी लियाओ लॉन्गहुई के साथ उसके दो भारतीय सहयोगियों संजीव कुमार और कोशलेन्द्र को गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों के कब्जे से पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, दो चीनी पासपोर्ट, एक चीनी आईडी, दो पैन कार्ड, 10 विभिन्न कंपनियों की मोहरें, 11 अलग-अलग बैंकों की चेकबुक, फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज, करीब 4 करोड़ 72 लाख 69 हजार 27 रुपये के विभिन्न बैंकों के चेक तथा 15,400 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा आरोपी के पास से नागालैंड के पते पर बना सैमुअल लोथा नाम का आधार कार्ड भी बरामद हुआ, जिस पर उसकी फोटो लगी हुई थी।

जांच में सामने आया कि लियाओ लॉन्गहुई वर्ष 2018 में भारत आया था और उसका वैध भारतीय वीजा वर्ष 2020 में समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वह पिछले लगभग छह वर्षों से फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा था।

एसटीएफ के मुताबिक, वह अपने ससुर म्यूजेन यू और साले क्यूपिंग टैंग द्वारा स्थापित वाईटीएल कंपनी का संचालन कर रहा था। यह कंपनी मोबाइल फोन के कवर बनाने का कार्य करती थी, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि चीन से महंगे दामों पर कच्चा माल मंगाकर दिल्ली के करोल बाग, नेहरू प्लेस समेत विभिन्न बाजारों में अंडर इनवॉइसिंग के जरिए सामान बेचा जाता था। इसके बाद अवैध धन का लेन-देन हवाला नेटवर्क के माध्यम से किया जाता था।

एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने कर्मचारियों और यहां तक कि अपने ड्राइवर के नाम पर भी कई शेल कंपनियां बनाई थीं। इनमें हनुराज ट्रेडिंग सल्यूशन, एंटरप्राइजेज इंडिया, टीडीडेस्क एसेंशियल, जेड वन एंटरप्राइजेज, उपमेक्स इंडिया, मेजटेक पावर इंडिया, एक्सीलेंस मोबाइल टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा हांगकांग में पंजीकृत हैक हैंको कम्युनिकेशन ट्रेडिंग और हैक इंचियोन लिमिटेड जैसी कंपनियों का भी कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेन-देन में उपयोग किया जा रहा था।

एसटीएफ के मुताबिक, पूरे नेटवर्क का संचालन चीनी नागरिक लियो लॉन्गुई कर रहा था, जबकि उसके भारतीय सहयोगी फर्जी कंपनियां खोलने, बैंक खाते संचालित करने और दस्तावेज तैयार कराने में मदद करते थे। जांच में चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है और उसकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

वाईटीएल कंपनी से जुड़े एक पूर्व शेयरधारक रवि कुमार ढक्कर नटवरलाल पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैन और जीएसटी नंबर प्राप्त करने के मामले में दर्ज मुकदमे में गौतमबुद्ध नगर जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, शेल कंपनियों, हवाला लेन-देन और विदेशी फंडिंग की कड़ियों को खंगाल रही हैं।


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