गाजियाबाद में तीन बहनों की सामूहिक आत्महत्या: सुसाइड नोट में झलकी कोरियन पॉप की दीवानगी और सामने आया पारिवारिक तनाव

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तीनों बहनों द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट है। नोट में उन्होंने खुद को “कोरियन” और अपने परिवार को “इंडियन और बॉलीवुड” बताया है। उन्होंने लिखा कि वे खुद को के-पॉप और कोरियन सितारों के बेहद करीब महसूस करती थीं और उन्हें ही अपना “सब कुछ” मानती थीं।

Update: 2026-02-05 05:42 GMT
गाजियाबाद : एक ही परिवार की तीन सगी बहनों द्वारा सामूहिक आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मामले की जांच के दौरान बरामद सुसाइड नोट और घर की दीवारों पर लिखी गईं बातें उनकी मानसिक स्थिति, कोरियन पॉप संस्कृति के प्रति गहरी दीवानगी और पारिवारिक तनाव की परतें खोलती नजर आ रही हैं। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है, वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार लंबे समय से सामाजिक रूप से अलग-थलग था।

सुसाइड नोट में ‘हम कोरियन हैं’ की घोषणा

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तीनों बहनों द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट है। नोट में उन्होंने खुद को “कोरियन” और अपने परिवार को “इंडियन और बॉलीवुड” बताया है। उन्होंने लिखा कि वे खुद को के-पॉप और कोरियन सितारों के बेहद करीब महसूस करती थीं और उन्हें ही अपना “सब कुछ” मानती थीं। तीनों बहनों ने अपने नाम बदलकर मारिया, एलिजा और सिंडी रख लिए थे। उनका रहन-सहन, पहनावा और हेयर स्टाइल भी कोरियन पॉप स्टार्स से प्रेरित था। वे अपनी तीन साल की छोटी बहन देव्यांशी (देवु) को भी “कोरियन लवर” बनाना चाहती थीं। सुसाइड नोट में उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के सदस्य उन्हें ऐसा करने से रोकते थे, जिस कारण उन्हें डांट और मार भी सहनी पड़ती थी। उन्होंने लिखा कि “हम तुम्हारी मार खाने के लिए इस दुनिया में नहीं आए हैं, मार से बेहतर हमें मौत अच्छी लगेगी।”

छोटी बहन को लेकर भी तनाव

नोट के अनुसार तीनों बहनें देवु को के-पॉप और कोरियन संस्कृति से जोड़ना चाहती थीं। वे उसे कोरियन सितारों के बारे में बतातीं और उन्हें “रिश्तेदार” की तरह संबोधित करने को कहतीं। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्य देवु को सामान्य पढ़ाई-लिखाई और भारतीय संस्कृति से जोड़ने की बात करते थे। इस बात को लेकर घर में विवाद होता था। सुसाइड नोट में यह भी लिखा गया है कि उन्होंने गुस्से में देवु को “दुश्मन” मान लिया था और खुद से अलग कर दिया था।

दीवारों पर लिखे संदेशों में झलकता  तनाव

घटना के बाद जब पुलिस और फॉरेंसिक टीम फ्लैट में पहुंची, तो घर की दीवारों पर लिखे संदेशों और चित्रों ने सभी को चौंका दिया। दीवारों पर पेंसिल और पेंट से बने स्केच, राधा-कृष्ण की तस्वीरों पर क्रॉस का निशान और अंग्रेजी में लिखे वाक्य—“I am very alone”, “Make me a heart of broken”—उनकी आंतरिक पीड़ा को दर्शाते हैं। कमरे में कोरियन पॉप स्टार्स के पोस्टर, बीएल ड्रामा और एशियाई मनोरंजन सामग्री से जुड़ी वस्तुएं बिखरी मिलीं। सुसाइड नोट में उन्होंने कोरियन, चीनी और थाई कलाकारों, फिल्मों और कार्टूनों के प्रति अपने लगाव का विस्तार से उल्लेख किया है।

सामाजिक अलगाव और सीमित संपर्क

सोसायटी के लोगों का कहना है कि तीनों बहनें शायद ही कभी फ्लैट से बाहर निकलती थीं। उन्हें अन्य बच्चों के साथ खेलते या घुलते-मिलते नहीं देखा गया। परिवार के सदस्य भी पड़ोसियों से बहुत कम संपर्क रखते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह से ही फ्लैट के बाहर लोगों की भीड़ जमा रही और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

पिता की दूसरी शादी और पारिवारिक जटिलताएं

पारिवारिक पृष्ठभूमि भी इस त्रासदी में अहम भूमिका निभाती नजर आ रही है। पिता चेतन की शादी लगभग दो दशक पहले सुजाता से हुई थी। कुछ वर्षों तक संतान न होने पर उन्होंने अपनी साली हिना से दूसरी शादी कर ली। इसके बाद परिवार में पांच बच्चे हुए-सुजाता से एक बेटी और एक बेटा तथा हिना से तीन बेटियां। इतने बड़े परिवार की जिम्मेदारी तीन अभिभावकों के बीच बंटी रही, लेकिन सूत्रों के अनुसार बच्चों की शिक्षा और भावनात्मक देखभाल में कमी रह गई। पुलिस के मुताबिक मई 2025 में दोनों पत्नियां बिना बताए घर छोड़कर चली गई थीं। हालांकि कुछ दिनों बाद वे लौट आईं और गुमशुदगी की रिपोर्ट समाप्त कर दी गई। बताया जा रहा है कि उस समय भी पारिवारिक तनाव चरम पर था।

‘यू आर इंडियन, आइ एम कोरियन’

परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि पिता अक्सर बेटियों की शादी की बात करते थे, ताकि वे “कोरियन लत” से बाहर आ सकें। इस पर तीनों बहनें जवाब देती थीं—“यू आर इंडियन, आइ एम कोरियन।” वे भारतीय युवक से शादी करने से इनकार करती थीं और कोरिया जाने तथा किसी कोरियन से विवाह करने की जिद करती थीं। शादी का नाम सुनकर वे डरने की बात कहती थीं।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। डिजिटल डिवाइस, सोशल मीडिया गतिविधियों और सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह मामला पारिवारिक तनाव, सामाजिक अलगाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएगा।

डिजिटल दीवानगी और मानसिक स्वास्थ्य

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरावस्था में किसी संस्कृति या सेलिब्रिटी के प्रति आकर्षण सामान्य है, लेकिन जब यह पहचान (आइडेंटिटी) का हिस्सा बन जाए और वास्तविक जीवन से दूरी पैदा कर दे तो यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। सामाजिक अलगाव, पारिवारिक संवाद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता का अभाव ऐसे मामलों को और जटिल बना देता है।

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