अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सौंपे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई नए आरोप भी लगाए हैं। महिपाल सिंह ने इससे पहले राम मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपतराय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र सहित कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब उन्होंने एसआईटी के सामने अपने दावों के समर्थन में जानकारी उपलब्ध कराई है।
एसआईटी ने मांगे थे आरोपों से जुड़े प्रमाण
मामले की जांच कर रही एसआईटी के अध्यक्ष और लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने 26 जुलाई को महिपाल सिंह को ई-मेल भेजकर आरोपों से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने का अवसर दिया था। उन्हें यह भी बताया गया था कि आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका बयान दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद महिपाल सिंह ने एसआईटी को दस्तावेज सौंपे और अपने पुराने आरोपों को दोहराते हुए कुछ नए बिंदु भी सामने रखे।
चढ़ावा चोरी को लेकर लगाए पुराने आरोप
महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में ही उन्हें चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी मिल गई थी। उनका दावा है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा नोटों की गड्डियों की गणना में गड़बड़ी की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में जानकारी देने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं की गई और बाद में उन्हें जिम्मेदारी से हटा दिया गया। महिपाल के अनुसार, जिस व्यक्ति को बाद में जिम्मेदारी दी गई, वह वर्तमान में पुलिस जांच के दायरे में है।
मंदिर निर्माण और खर्च को लेकर भी उठाए सवाल
महिपाल सिंह ने मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों और खर्च को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआती अनुमान की तुलना में निर्माण लागत काफी बढ़ी और इसमें कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने की आशंका है। उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए नियुक्त कुछ अधिकारियों के पास संबंधित क्षेत्र का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इसके अलावा उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
ट्रस्ट कार्यालय और संपत्तियों की खरीद पर आरोप
पूर्व लेखा प्रभारी ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट कार्यालय के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया गया, जहां निश्शुल्क विकल्प उपलब्ध थे। उन्होंने कुछ संपत्तियों की खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विवादित संपत्तियों को खरीदने से बाद में कानूनी परेशानियां पैदा हुईं। महिपाल ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट के धन के इस्तेमाल और विभिन्न आयोजनों से जुड़े खर्चों में पारदर्शिता की जरूरत है।
भुगतान और वित्तीय प्रबंधन पर उठाए सवाल
महिपाल सिंह ने ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ ऐसे व्यक्तियों को भुगतान किया गया, जिन्होंने कथित रूप से कोई काम नहीं किया था। उन्होंने ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि निर्माण कंपनियों के बिलों तथा भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। उनका कहना है कि ऐसे व्यक्ति को बैंक खातों के संचालन की जिम्मेदारी देना जांच का विषय होना चाहिए।
एसआईटी जांच पर टिकी नजरें
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब एसआईटी महिपाल सिंह की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और आरोपों की जांच करेगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और क्या किसी स्तर पर वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई है। फिलहाल इस मामले में सभी आरोप जांच के दायरे में हैं। एसआईटी की जांच और आगे आने वाली रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामलों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है।