UP में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रमों पर रोक की अखिलेश यादव की मांग, सियासी बयानबाजी तेज

लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने भी विवाद को हवा दी है। एक पोस्टर में धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीर पर क्रॉस का निशान बनाया गया है। दूसरे होर्डिंग में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के साथ दिखाते हुए “27 में कृष्ण आएंगे” संदेश लिखा गया है।;

Update: 2026-11-05 05:21 GMT

लखनऊ: कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर विवाद अब राजनीतिक रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से शास्त्री के प्रस्तावित सार्वजनिक कार्यक्रमों को अनुमति न देने की अपील की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर नवंबर-दिसंबर में अंबेडकरनगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा में होने वाले आयोजनों का उल्लेख किया। इनमें कुंडा का कार्यक्रम 17 से 19 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसे जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के विधायक रघुराज प्रताप सिंह करा रहे हैं। अखिलेश की अपील के बाद कार्यक्रमों की अनुमति और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

लखनऊ में पोस्टरों से बढ़ा विवाद

लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने भी विवाद को हवा दी है। एक पोस्टर में धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीर पर क्रॉस का निशान बनाया गया है। दूसरे होर्डिंग में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के साथ दिखाते हुए “27 में कृष्ण आएंगे” संदेश लिखा गया है। पोस्टर पर लिखे संदेश में राम और कृष्ण को किसी एक पक्ष की संपत्ति मानने का विरोध किया गया है। खबरों के मुताबिक, यह होर्डिंग सपा नेता अब्दुल अजीम मंसूरी ने शास्त्री की टिप्पणी के विरोध में लगवाई। मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस से शिकायत कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

अखिलेश की तीखी प्रतिक्रिया

अखिलेश यादव ने कहा कि शास्त्री की टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों—दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्री को न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में। अखिलेश ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक भूमि पर उनके कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग भी की। उन्होंने अपने वक्तव्यों में शास्त्री के सभी प्रस्तावित कार्यक्रम बंद कराने और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से उनके आश्रम पर बुलडोजर चलाने जैसी तीखी बात भी कही। ये राजनीतिक बयान हैं; कार्यक्रमों पर रोक या कानूनी कार्रवाई का फैसला संबंधित प्रशासन और कानून के तहत होना है। सपा यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव प्रवेश यादव ने हजरतगंज थाने में शिकायत देकर एफआईआर की मांग की है।

कैसे शुरू हुआ राम-कृष्ण विवाद?

विवाद की शुरुआत 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान हुई टिप्पणी से हुई। वायरल वीडियो के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए राम को सीधा और कृष्ण को तीन जगह से टेढ़ा बताया। उन्होंने धनुष चलाने और बांसुरी बजाने के संदर्भ में भी तुलना की। वीडियो सामने आने के बाद ब्रज क्षेत्र के कुछ संतों ने आपत्ति जताई। इसके बाद धार्मिक टिप्पणी राजनीतिक बहस का विषय बन गई। अखिलेश ने बयान को भावनाएं आहत करने वाला बताया, जबकि शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण उनके भी भगवान हैं और उनकी बात को गलत अर्थ में लिया गया।

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