नृपेंद्र मिश्रा बोले-राममंदिर चढ़ावा चोरी कलंक, छोटापन महसूस कर रहा, हाईलेवल जांच समिति की रिपोर्ट पर करेगा ट्रस्ट फैसला

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। उनके अनुसार, समिति की अध्यक्षता संभवतः एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं। समिति अपनी जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट और सिफारिशें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके बाद ट्रस्ट उन सुझावों पर विचार कर आगे की कार्रवाई तय करेगा।;

Update: 2026-07-11 09:53 GMT

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इसे अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यह घटना पूरे मंदिर प्रशासन के लिए एक "कलंक" के समान है। उन्होंने कहा कि इस घटना से केवल दुख ही नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों को आत्मग्लानि भी महसूस हो रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच के बाद आवश्यक सुधार किए जाएंगे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी। शनिवार को रामकथा संग्रहालय में आयोजित निर्माण समिति की बैठक में भाग लेने पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की।

हाईलेवल समिति करेगी जांच, रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। उनके अनुसार, समिति की अध्यक्षता संभवतः एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं। समिति अपनी जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट और सिफारिशें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके बाद ट्रस्ट उन सुझावों पर विचार कर आगे की कार्रवाई तय करेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

निर्माण समिति की बैठक में निर्माण कार्यों की समीक्षा

राम मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक के दूसरे दिन भी मंदिर परिसर से जुड़े विभिन्न निर्माण और हस्तांतरण कार्यों की समीक्षा की गई। जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर के अधिकांश निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं और लगभग सभी परियोजनाओं का औपचारिक हस्तांतरण ट्रस्ट को किया जा चुका है। केवल कुछ तकनीकी और प्रशासनिक दस्तावेजों पर अंतिम सहमति मिलना बाकी है। सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद परियोजना से जुड़ी प्रमुख एजेंसियों की जिम्मेदारी 15 जुलाई तक समाप्त कर दी जाएगी।

एलएंडटी ने बताया- अधिकांश कार्य पूरे

राम मंदिर निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वाली कंपनी एलएंडटी के परियोजना निदेशक वी. के. मेहता ने बताया कि उनकी कंपनी की ओर से सौंपे गए सभी प्रमुख निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि परिसर में केवल हुतात्मा स्मारक का निर्माण शेष है। अन्य निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के माध्यम से पूरे किए जा रहे हैं। निर्माण एजेंसियों के अंतिम हस्तांतरण के बाद मंदिर परिसर का संपूर्ण संचालन ट्रस्ट के अधीन रहेगा।

ट्रस्ट पदाधिकारियों की गतिविधियां जारी

इस बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि गुरुवार को अयोध्या से पुणे रवाना हो गए थे। इससे पहले उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की थी। वहीं, ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बनाए गए सदस्य कृष्णमोहन भी अपने गृह जनपद हरदोई चले गए। उनके जाने के बाद स्थानीय ट्रस्टी दिनेंद्रदास मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। बताया गया कि वह प्रतिदिन रामलला के दर्शन करने के साथ मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

राम मंदिर से जुड़े इस प्रकरण ने राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के नेता उपेंद्र दत्त शुक्ला की ओर से लगाए गए पोस्टरों में मंदिर प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए गए। पोस्टरों में व्यंग्यात्मक नारे लिखे गए, जिनमें चढ़ावे और सुरक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी की गई। दूसरी ओर, रायबरेली में विश्व हिंदू रक्षा परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय महामंत्री राहुल सिंह ने पोस्टर लगाकर समाजवादी पार्टी पर पलटवार किया। पोस्टरों में कहा गया कि राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही यह भी लिखा गया कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनके नाम पर राजनीति उचित नहीं है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण के बाद अब सभी की निगाहें उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। ट्रस्ट ने संकेत दिया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर यदि व्यवस्था में किसी तरह की कमी पाई जाती है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि है और पारदर्शिता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। वहीं, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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