फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के दोषी को फांसी, अदालत ने कहा- यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का अपराध

सजा सुनाने से पहले अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं और यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। अदालत ने घटना की क्रूरता और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कठोरतम दंड देने का फैसला सुनाया।;

Update: 2026-07-10 10:14 GMT

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के चर्चित आरव हत्याकांड में जिला अदालत ने दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने शुक्रवार को सजा का एलान करते हुए मामले को अत्यंत जघन्य माना। इससे एक दिन पहले अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी ठहराया था। सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी अदालत में भावुक हो गया। फैसले के बाद पुलिस उसे कड़ी सुरक्षा के बीच वापस जेल ले गई।

अदालत ने साक्ष्यों को माना पर्याप्त

सजा सुनाने से पहले अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं और यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। अदालत ने घटना की क्रूरता और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कठोरतम दंड देने का फैसला सुनाया। भारतीय कानून के अनुसार, मृत्यु दंड के क्रियान्वयन से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है।

कोर्ट परिसर में मौजूद था पीड़ित परिवार

फैसले के दौरान मृतक मासूम आरव की नानी पिंकी देवी भी अदालत परिसर में मौजूद थीं। उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है। फैसले के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे और आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में सीधे जेल ले जाया गया।

30 मई को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात

यह घटना 30 मई को फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित यादव कॉलोनी में हुई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने कथित तौर पर अपने रिश्ते की भाभी रति से विवाह करने की इच्छा पूरी न होने पर उसके डेढ़ वर्षीय बेटे आरव को निशाना बनाया। जांच के अनुसार, आरोपी बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने घर से बाहर ले गया। इसके बाद घर से कुछ दूरी पर सुनसान सड़क पर उसने मासूम के साथ बेहद हिंसक वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक, घटना कुछ ही सेकंड में हुई और बाद में आरोपी बच्चे को वहीं छोड़कर फरार हो गया।

सीसीटीवी फुटेज बना अहम सबूत

जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मिली, जिसे इस मामले का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। जांच एजेंसियों ने इसी सहित अन्य तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित करते हैं।

घटना के बाद हुई थी गिरफ्तारी

वारदात के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और उसी रात उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी थी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच पूरी होने के बाद मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ी और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।

समाज में गूंजा था मामला

मासूम आरव की हत्या की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। घटना से जुड़ी खबरें और सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद लोगों में व्यापक आक्रोश देखा गया था। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की थी। अब जिला अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद इस चर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत मृत्यु दंड का अंतिम क्रियान्वयन उच्च न्यायालय की पुष्टि और आगे उपलब्ध कानूनी उपायों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।

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