एक्सपर्ट बनो, ससुराल में यूट्यूब देख डिश बनाना सही नहीं : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को राज्यपाल ने छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ कोई न कोई व्यावहारिक कौशल भी सीखना चाहिए, जिससे वह रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसर भी पैदा कर सके।;

Update: 2026-07-11 06:58 GMT

कानपुर : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय से मिलने वाली डिग्री किसी छात्र की अंतिम उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि देश और समाज के विकास में भी सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ भी बनेंगे।

पढ़ाई के साथ हुनर सीखना भी जरूरी

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को राज्यपाल ने छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ कोई न कोई व्यावहारिक कौशल भी सीखना चाहिए, जिससे वह रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसर भी पैदा कर सके। उनके अनुसार, आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव ऐसे युवाओं पर ही टिकेगी, जो ज्ञान के साथ कौशल से भी संपन्न हों।

छात्राओं से कहा- पहले विशेषज्ञ बनें, फिर आत्मनिर्भर

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना आवश्यक है, लेकिन उससे पहले उन्हें अपने जीवन और कार्यक्षेत्र में दक्ष एवं विशेषज्ञ बनने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने घरेलू जीवन से जुड़ा उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं और पारंपरिक कौशलों का ज्ञान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि तकनीक उपयोगी है, लेकिन दैनिक जीवन के आवश्यक कार्यों में आत्मविश्वास और दक्षता होना भी जरूरी है।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू

दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से निश्शुल्क टीकाकरण अभियान का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि समय रहते टीकाकरण और नियमित जांच को बढ़ावा दिया जाए, तो सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों से स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह भी किया।

विकसित भारत के लिए कुशल युवाओं की जरूरत: प्रो. योगेश सिंह 

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चेयरमैन प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिभाशाली, नवाचारी और कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश में स्टार्टअप संस्कृति, नवाचार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान मिशन और छात्र हैकाथॉन जैसे प्रयासों ने मजबूत आधार तैयार किया है। इन पहलों के कारण युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं और भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

विदेश में सीखें, लेकिन देश लौटकर दें योगदान

प्रो. योगेश सिंह ने छात्रों को विदेशों में उच्च शिक्षा और अनुभव प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अर्जित ज्ञान और अनुभव का उपयोग भारत के विकास में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश के युवा वैश्विक स्तर पर सीखने के बाद अपने देश की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

चर्म शिल्प संरक्षण के लिए अंचल बिजलानी को डी.लिट. सम्मान 

दीक्षांत समारोह में गुजरात के कच्छ क्षेत्र की पारंपरिक चर्म शिल्प कला के संरक्षण और विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को विश्वविद्यालय की ओर से डी.लिट. (मानद) उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय ने उनके कार्य को भारतीय पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया।

युवाओं को जिम्मेदारी और कौशल का संदेश

समारोह का मुख्य संदेश यही रहा कि आज के युवाओं को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को अपनाकर ही वे विकसित भारत के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल और एआईसीटीई चेयरमैन दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत की प्रगति का आधार उसकी युवा शक्ति ही होगी।

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