उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार से प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए मांगा जवाब
न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन और न्यायमूर्ति एस. कुमार की खंडपीठ ने बिहार को प्लास्टिक (पॉलिथीन ) मुक्त राज्य क्यों नही बनाया जा सकता
पटना। पटना उच्च न्यायालय ने बिहार में प्लास्टिक (पॉलिथीन) के इस्तेमाल के औचित्य पर सवाल उठाते हुये इस पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य के मुख्य सचिव, शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष एवं पटना के जिलाधिकारी को जवाब देने के लिए 23 जुलाई को हाजिर होने का आज आदेश दिया।
न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन और न्यायमूर्ति एस. कुमार की खंडपीठ ने बिहार को प्लास्टिक (पॉलिथीन ) मुक्त राज्य क्यों नही बनाया जा सकता और राज्य में पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक क्यों नही लगाई जा सकती, इन सवालों का जवाब देने के लिए मुख्य सचिव, शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष सहित पटना के जिलाधिकारी एवं अन्य उच्च अधिकारियों को 23 जुलाई को हाज़िर होने का आदेश दिया है।
इससे पूर्व न्यायालय ने गया जिले के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में मुचलिन्द झील को प्लास्टिक और पॉलिथीन बैग फेंककर प्रदूषित किये जाने की अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुये गया के जिलाधिकारी को जवाब सहित अदालत में हाज़िर होने का आदेश दिया था।
गया के जिलाधिकारी ने अपने जवाब में बताया कि बोधगया मन्दिर परिसर के अंदर प्लास्टिक और पॉलिथीन ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने पॉलिथीन के इस्तेमाल के औचित्य पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि यदि राज्य में ही पॉलिथीन और प्लास्टिक बैग पर रोक लगा दी जाए तो गन्दगी, जल जमाव और प्रदूषण की समस्या क्या कम नहीं हो जाएगी।