T20 विश्व कप में टीम भेजने को लेकर पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ियों व अधिकारियों ने क्‍या कहा, समर्थन बनाम राष्ट्रीय हित की बहस तेज

पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने इस पूरे मामले पर शुक्रवार या सोमवार तक अंतिम फैसला लेने की समयसीमा तय की है। लेकिन इससे पहले ही पाकिस्तान के क्रिकेट हलकों में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है कि अगर टीम को विश्व कप से दूर रखा गया, तो इसका नुकसान सिर्फ खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि पूरे देश के क्रिकेट ढांचे को होगा।

Update: 2026-01-28 08:42 GMT

इस्लामाबाद/दुबई। आगामी टी20 विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के फैसले में हो रही देरी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के बाद उत्पन्न हालात में पीसीबी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पाकिस्तान टीम विश्व कप में हिस्सा लेगी या नहीं। इस बीच पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ियों, चयनकर्ताओं और बोर्ड के पूर्व अधिकारियों ने एक सुर में कहा है कि बांग्लादेश का समर्थन नैतिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह समर्थन पाकिस्तान क्रिकेट के दीर्घकालिक हितों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने इस पूरे मामले पर शुक्रवार या सोमवार तक अंतिम फैसला लेने की समयसीमा तय की है। लेकिन इससे पहले ही पाकिस्तान के क्रिकेट हलकों में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है कि अगर टीम को विश्व कप से दूर रखा गया, तो इसका नुकसान सिर्फ खिलाड़ियों को ही नहीं बल्कि पूरे देश के क्रिकेट ढांचे को होगा।

बांग्लादेश विवाद से कैसे पैदा हुई स्थिति

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर करने का फैसला किया। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने भारत के खिलाफ अपने मैच हटाने की मांग की थी, जिसे आईसीसी और अन्य सदस्य बोर्डों का समर्थन नहीं मिला। इसके बाद आईसीसी ने टूर्नामेंट के कार्यक्रम में बदलाव करते हुए बांग्लादेश को बाहर रखने का निर्णय लिया।

पाकिस्तान ने इस फैसले पर बांग्लादेश के प्रति सहानुभूति जताई और संकेत दिए कि वह इस मुद्दे पर अपने रुख पर विचार करेगा। यही वह बिंदु है, जहां पीसीबी का निर्णय टलता चला गया और अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सिर्फ समर्थन के प्रतीकात्मक कदम के तौर पर विश्व कप से हट सकता है।

मोहम्मद हफीज: टीम को भेजना ही चाहिए

पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कप्तान मोहम्मद हफीज ने साफ शब्दों में कहा है कि पीसीबी को पाकिस्तान टीम को विश्व कप में जरूर भेजना चाहिए। हफीज के मुताबिक, बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लेना खिलाड़ियों के विकास और टीम की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “आप किसी दूसरे बोर्ड का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन आखिर में आपको अपने क्रिकेट और अपने खिलाड़ियों के बारे में सोचना होगा। विश्व कप जैसे मंच पर न खेलना पाकिस्तान क्रिकेट के लिए पीछे जाने जैसा होगा।”

पूर्व पीसीबी अधिकारियों की दो टूक

पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष खालिद महमूद और पूर्व सचिव आरिफ अली अब्बासी ने भी मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए हैं। अब्बासी का मानना है कि टीम को नहीं भेजने के फैसले में उन्हें कोई ठोस तर्क नजर नहीं आता। अब्बासी ने कहा, “मैं समझ सकता हूं कि पाकिस्तान बांग्लादेश का समर्थन कर रहा है, लेकिन आईसीसी और अन्य सदस्य बोर्डों के साथ रिश्ते खराब करके पीसीबी क्या हासिल करेगा? आखिर में नुकसान पाकिस्तान क्रिकेट का ही होगा।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वह जगमोहन डालमिया और आई.एस. बिंद्रा जैसे दिग्गजों के कार्यकाल में बोर्ड के साथ काम कर चुके हैं और उनके अनुभव में कभी भी भावनात्मक फैसलों को खेल के हितों से ऊपर नहीं रखा गया।

श्रीलंका का एंगल: एक और बड़ा सवाल


आरिफ अली अब्बासी ने इस पूरे मामले में श्रीलंका के हितों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान टीम विश्व कप में हिस्सा नहीं लेती, तो इसका सीधा असर श्रीलंका पर पड़ेगा। उन्होंने बताया, “भारत के खिलाफ मुकाबलों सहित पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका में होने हैं। अगर पाकिस्तान नहीं जाता है, तो मेजबान के तौर पर श्रीलंका को भारी नुकसान होगा। ऐसे में हमारे श्रीलंका के साथ रिश्तों का क्या होगा?” यह तर्क इस बहस को और जटिल बना देता है, क्योंकि मामला अब सिर्फ पाकिस्तान और बांग्लादेश तक सीमित नहीं रह जाता।

खालिद महमूद: प्राथमिकता पाकिस्तान क्रिकेट

पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष खालिद महमूद ने कहा कि बोर्ड का बांग्लादेश के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख सराहनीय है, लेकिन समझदारी इसी में है कि पाकिस्तान क्रिकेट के हितों को केंद्र में रखा जाए।

उन्होंने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान के अलावा किसी भी अन्य क्रिकेट बोर्ड ने बांग्लादेश की उस मांग का समर्थन नहीं किया, जिसमें भारत के खिलाफ मैच हटाने की बात कही गई थी। आईसीसी की बैठक में बांग्लादेश को किसी का समर्थन नहीं मिला। ऐसे में अकेले पाकिस्तान का इतना बड़ा कदम उठाना व्यावहारिक नहीं लगता।”

मोहसिन खान की चेतावनी: ‘यह नुकसानदेह होगा’

पूर्व बल्लेबाज और चयनकर्ता मोहसिन खान ने भी पीसीबी से विश्व कप के लिए टीम भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलने वाला है। मोहसिन खान ने कहा, “मैंने पढ़ा है कि बांग्लादेश बोर्ड न तो आईसीसी के फैसले के खिलाफ अपील करेगा और न ही उसे चुनौती देगा। अगर ऐसा है, तो फिर पीसीबी किस आधार पर टीम को विश्व कप में नहीं भेजेगा? यह फैसला हमारे क्रिकेट के लिए बेहद नुकसानदेह होगा।”

इंजमाम और यूसुफ की संतुलित सलाह

पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक और मोहम्मद यूसुफ ने पीसीबी को अंतिम फैसला लेते समय सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी है।

इंजमाम ने कहा, “मैं पाकिस्तान को विश्व कप में खेलते देखना चाहता हूं। हमारे पास अच्छे खिलाड़ी हैं और हमारे क्रिकेट को बड़े टूर्नामेंटों में अच्छे प्रदर्शन की जरूरत है।” यूसुफ ने भी इसी तरह की राय रखते हुए कहा कि भावनाओं से ज्यादा व्यावहारिकता से फैसला लेना जरूरी है।

आईसीसी और बांग्लादेशी पत्रकारों का मुद्दा


इस पूरे विवाद के बीच एक और पहलू सामने आया है। आईसीसी अब विश्व कप कवर करने की इच्छा रखने वाले बांग्लादेशी पत्रकारों के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन प्रक्रिया पर फिर से काम कर रहा है। कुछ बांग्लादेशी पत्रकारों ने दावा किया था कि आईसीसी ने उनके एक्रिडिटेशन अनुरोध खारिज कर दिए थे। इसके बाद आईसीसी सूत्रों ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है, क्योंकि अनुरोधों की संख्या और टूर्नामेंट के कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश से लगभग 80-90 पत्रकारों ने एक्रिडिटेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन देश के कोटे के हिसाब से 40 से ज्यादा पत्रकारों को अनुमति देना संभव नहीं है। आईसीसी आमतौर पर मेजबान और संबंधित घरेलू बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर ही अंतिम सूची तैयार करता है।

फैसला सिर्फ एक टूर्नामेंट का नहीं

टी20 विश्व कप में भागीदारी को लेकर पीसीबी के सामने फैसला आसान नहीं है। एक ओर बांग्लादेश के प्रति समर्थन और राजनीतिक-सांकेतिक संदेश का सवाल है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान क्रिकेट का भविष्य, खिलाड़ियों का करियर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की मौजूदगी। अब जब पूर्व खिलाड़ी, पूर्व अधिकारी और क्रिकेट विशेषज्ञ लगभग एकमत होकर टीम को विश्व कप में भेजने की बात कर रहे हैं, तो नजरें पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह फैसला सिर्फ एक टूर्नामेंट में खेलने या न खेलने का नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।Do you like this personality?

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