इस वर्ष पंजीयक विभाग को 25 करोड़ की राजस्व नुकसान

जमीन खरीदी बिक्री के माध्यम से होने वाली राजस्व आय में इस बार पंजीयक विभाग को 25 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है

Update: 2018-04-10 13:07 GMT

जांजगीर। जमीन खरीदी बिक्री के माध्यम से होने वाली राजस्व आय में इस बार पंजीयक विभाग को 25 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। इस वर्ष 68 करोड़ राजस्व आय प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरूद्ध जिला पंजीयक विभाग ने 31 मार्च तक 43 करोड़ रूपए की राजस्व आय प्राप्त किया है। पिछले तीन वर्षों से लगातार राजस्व आय में गिरवट का सिलसिला जारी है, जो इस बार और ज्यादा बढ़ा है। 

गौरतलब है कि जिले में प्रतिवर्ष लोग अपनी सुविधा के हिसाब से जमीन की खरीदी बिक्री करते है। वहीं खरीदी बिक्री के माध्यम से जो शुल्क जमा होता है, वह राज्य शासन के खाते में चली जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जिला पंजीयक विभाग को जमीन खरीदी बिक्री के माध्यम से 68 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य मिला था।

लक्ष्य में पीछा करते हुये विभाग ने 31 मार्च तक 43 करोड़ की राजस्व आय प्राप्त सका है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी लक्ष्य से 25 करोड़ कम रह गया है। उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के साथ-साथ जीएसटी का असर भी जमीन खरीदी बिक्री पर पड़ रहा है। पहले के अपेक्षा लोग जमीन खरीदी बिक्री कम कर दिये है।

देखा जाये तो पिछले वर्ष जमीन के दामों में वृद्धि नहीं की गई है। वहीं इस वर्ष भी विभाग द्वारा जांच पड़ताल कर केन्द्रीय मूल्यांकन समिति रायपुर को अपनी रिपोर्ट भेजी गई थी। उच्च स्तर के अधिकारियों से मिला दिशा-निर्देश के अनुसार इस वर्ष भी केन्द्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा जमीन की खरीदी बिक्री में कोई वृद्धि नहीं की गई है।

हर जगह जमीन की कीमत रिहायसी इलाका सड़क, खेत सहित अन्य जगहों के हिसाब से तय होती है। इसके अलावा पहले जहां शासकीय कार्यालयों में नगद राशि के माध्यम से जमीन खरीदी बिक्री की जा चुकी है, वहीं समय के साथ नियम बदलाव किया गया है।

अब जमीन की खरीदी बिक्री ऑनलाईन के माध्यम से होती है। साथ ही साथ कार्यालय में जमीन खरीदी बिक्री की राशि चेक भुगतान एवं ऑनलाईन के माध्यम से कराया जाता है। जमीन की खरीदी बिक्री प्रक्रिया ऑनलाईन होने की वजह से जो लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुये है। उनको भी अब सर्तक होकर काम करना पड़ रहा है। 

आयकर कानून में हुये संशोधन भी एक कारण  
रजिस्ट्री के टारगेट पूरा नहीं होने के पीछे आयकर कानून में हुये संशोधन समेत रजिस्ट्री शुल्क में दी जाने वाली शुल्क शामिल है। नये नियम के तहत 20 हजार या उससे अधिक राशि भुगतान नगद में नहीं हो रहा है और ऐसा करने पर आयकर कानून की धारा 271 (डी) के तहत प्राप्त राशि के बराबर पेनाल्टी भी लगाई जा रही है।

ऐसे में लोग जमीन की खरीदी बिक्री की रजिस्ट्री करवाने कम गये है। इसके अलावा सारे काम ऑनलाईन हो रहे है। इस कारण भी पहले के मुकाबले काम काफी कम हो गये है। 

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