हनुमानगढ़ मंडियों में गेहूं खरीद पर घमासान

राजस्थान में आगामी गेहूं खरीद सीजन को लेकर हनुमानगढ़ जिले की मंडियों में घमासान शुरू हो गया है

Update: 2026-03-16 04:27 GMT

एफसीआई बनाम निजी एजेंसियाँ, व्यापारियों में बंटवारा

  • मजदूर संगठनों का विरोध, आंदोलन की चेतावनी

हनुमानगढ़। राजस्थान में आगामी गेहूं खरीद सीजन को लेकर हनुमानगढ़ जिले की मंडियों में घमासान शुरू हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा इस बार पांच एजेंसियों के माध्यम से खरीद की योजना के बीच व्यापार जगत दो धड़ों में बंट गया है, वहीं मजदूर संगठनों ने व्यवस्था में बदलाव को मजदूरों का शोषण बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। खरीद व्यवस्था को लेकर व्यापारियों की राय बंटी हुई है। हाल ही में जिला कलेक्टर से मुलाकात करके व्यापारियों के एक गुट ने खरीद का कार्य भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से करवाने की मांग रखी है। वहीं, संगरिया के व्यापारियों का दूसरा गुट पूर्व के कड़वे अनुभवों को देखते हुए एफसीआई के बजाय निजी कंपनियों को ब्लॉक आवंटित करने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

सूत्रों ने बताया कि मजदूर संगठनों ने इस नई व्यवस्था और निजी कंपनियों के प्रवेश का कड़ा विरोध किया है। मजदूर संगठन के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ पेंटर ने बताया कि भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) और जिला मजदूर संगठनों की बैठक में निर्णय लिया गया है कि 18 मार्च को जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्र बिंदुओं पर न तो पक्के प्लेटफार्म हैं और न ही शेड, जिससे किसानों की फसल खराब होने का डर है। गोदामों में गेहूं के कट्टों की 22 फुट ऊंची स्टेकिंग एक तकनीकी कार्य है, जिसे केवल प्रशिक्षित मजदूर ही कर सकते हैं। बाहरी मजदूरों से यह काम कराना संभव नहीं है। हैंडलिंग, सिलाई और मार्का जैसे कार्य कच्चे आढ़तियों के माध्यम से करवाने पर मजदूरों के शोषण की आशंका है। तुलाई और उठाव में होने वाली व्यवस्थागत देरी का ठीकरा अक्सर मजदूरों पर फोड़ दिया जाता है, जिसे मजदूर संगठन स्वीकार नहीं करेंगे।

अमरनाथ पेंटर ने चेतावनी दी है कि निजीकरण और नई व्यवस्था से मजदूरों को भारी परेशानी होगी। उन्होंने आगामी सीजन में सभी मजदूरों को अपने हक के प्रति सचेत और जागरूक रहने का आह्वान किया है।

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