सफाई कर्मचारी की बेटी की शादी में पुलिस का मानवीय चेहरा
अक्सर सख्त और अनुशासित नजर आने वाली खाकी के पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय हृदय भी धड़कता है
नारायणपुर थाने के पुलिसकर्मियों ने भरा 1.61 लाख का मायरा
- खाकी वर्दी ने निभाई सामाजिक परंपरा, परिवार हुआ भावुक
- इंसानियत की मिसाल: शादी में उपहार और सहयोग से चमकी खाकी
- पुलिस परिवार ने साझा की जिम्मेदारी, बेटी की विदाई बनी यादगार
कोटपूतली-बहरोड़। अक्सर सख्त और अनुशासित नजर आने वाली खाकी के पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय हृदय भी धड़कता है, इसकी एक जीवंत मिसाल राजस्थान में कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर पुलिस थाने में देखने को मिली।
यहाँ के पुलिसकर्मियों ने न केवल कानून की रक्षा की, बल्कि सामाजिक सरोकार निभाते हुए अपने थाने के सफाई कर्मचारी की बेटी की शादी में 'मायरा' (भात) भरकर इंसानीयत का एक अनुपम उदाहरण पेश किया है।
नारायणपुर थाने में कैलाश नामक सफाई कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएँ दे रहा है। जब उसकी बेटी की शादी तय हुई, तो आर्थिक तंगहाली के बीच खुशियाँ मनाने की चुनौती थी। जैसे ही यह बात थाना स्टाफ के संज्ञान में आई, बानसूर सीओ मेघा गोयल और थानाधिकारी रोहिताश कुमार के नेतृत्व में पूरे स्टाफ ने एकजुट होकर कैलाश की मदद करने का निर्णय लिया। पुलिसकर्मियों ने आपसी सहयोग से राशि एकत्रित की ताकि अपनी सहकर्मी की बेटी की शादी को यादगार बनाया जा सके।
शादी समारोह के दौरान जब खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मी हाथों में मायरे की थाल और उपहार लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे, तो हर कोई दंग रह गया। पुलिसकर्मियों ने सामाजिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए एक लाख 61 हजार रुपए की नकद राशि भेंट की साथ ही घरेलू उपयोग के विभिन्न सामान और कपड़े उपहार स्वरूप दिए।
नवदंपती को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया।
अपनी बेटी की शादी में पुलिस के इस बड़े सहयोग को देखकर कैलाश और उसका परिवार भावुक हो गया। कैलाश ने नम आंखों से कहा कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि थाने का स्टाफ इस तरह उसके परिवार की जिम्मेदारी साझा करेगा।
इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए बानसूर की वृत्ताधिकारी मेघा गोयल और थानाधिकारी रोहिताश कुमार ने कहा, "कैलाश हमारे थाने का महज एक कर्मचारी नहीं, बल्कि हमारे पुलिस परिवार का अभिन्न हिस्सा है। एक सहकर्मी के नाते उसकी खुशियों में शामिल होना और उसकी मदद करना हमारी पारिवारिक जिम्मेदारी थी। हम चाहते थे कि उसकी बेटी की विदाई सम्मानपूर्वक हो।"