मनी लॉन्ड्रिंग मामला: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की नियमित जमानत याचिका
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने खुली अदालत में यह आदेश सुनाया।;
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने खुली अदालत में यह आदेश सुनाया।
अरोड़ा ने गुरुग्राम की विशेष अदालत द्वारा 15 जून को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें कथित वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े मामले में 9 मई को गिरफ्तार किया था। तब से वह हिरासत में हैं।
यह मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (एचएसआरएल) से जुड़ा है, जिसके प्रमुख अरोड़ा पहले रह चुके हैं। जांच मोबाइल फोन के निर्यात से जुड़े 102.5 करोड़ रुपये के लेनदेन और कथित जीएसटी धोखाधड़ी पर केंद्रित है।
याचिका में अरोड़ा ने कहा था कि वह हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के प्रमोटर और चेयरमैन रहे हैं, लेकिन कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज में भाग लेना बंद कर दिया था।
पूर्व राज्यसभा सांसद अरोड़ा ने अपनी जमानत याचिका में दलील दी थी कि वह मौजूदा कैबिनेट मंत्री हैं, समाज में उनकी गहरी जड़ें हैं और उनका सार्वजनिक जीवन बेदाग रहा है।
उन्होंने ईडी के आरोपों को चुनौती देते हुए कहा था कि मोबाइल फोन के निर्यात से जुड़े लेनदेन वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा थे। उनके अनुसार, इन लेनदेन के समर्थन में चालान, जीएसटी रिकॉर्ड, सीमा शुल्क से संबंधित दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड मौजूद हैं।
अरोड़ा की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि उनके आवास, उनके बेटे के आवास और कंपनी के परिसरों में की गई तलाशी के दौरान उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।
बचाव पक्ष ने कहा था कि मामला ऐसे दस्तावेजों पर आधारित है, जो पहले से ही जांच एजेंसी के पास हैं। ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है। वहीं, ईडी की जांच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के खरीदारों को मोबाइल फोन के कथित निर्यात में अनियमितताओं और जीएसटी रिफंड के कथित फर्जी दावों पर केंद्रित है।