दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पीटीएम को लेकर हो रही है राजनीति

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अभिभावक-अध्यापक बैठक (पीटीएम) पर राजनीति तेज हो गई

Update: 2020-01-02 15:36 GMT

नयी दिल्ली । दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अभिभावक-अध्यापक बैठक (पीटीएम) पर राजनीति तेज हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन के बैठक को रद्द करने के लिए उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिखने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि पीटीएम समय पर होगी और अभिभावकों से फीडबैक लेने वह स्वयं कल किसी एक स्कूल में जायेंगे।

डॉ हर्षवर्धन ने बुधवार को उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखी थी जिसमें कहा गया है कि कड़ाके की ठंड की वजह से इतने सर्द मौसम में पीटीएम से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मौसम को देखते हुए पत्र में पीटीएम को लेकर आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।

 केजरीवाल ने डाॅ हर्षवर्धन के पीटीएम रद्द किए जाने के लिए उपराज्यपाल को लिखे पत्र के जबाव में गुरुवार को ट्वीट किया,“ ये लोग पीटीएम क्यों कैंसल करवाना चाहते हैं? पीटीएम में मां बाप को अपने बच्चों की प्रगति टीचर के साथ चर्चा करने का मौका मिलता है। कई पेरेंट्स पीटीएम का बेसब्री से इंतजार करते हैं। पीटीएम समय पर होगी। मैं भी पेरेंट्स का फीडबैक लेने कल किसी एक स्कूल में जाऊंगा।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में चार जनवरी को नौवीं, दसवीं और 12 वीं कक्षा के लिए अभिभावक-अध्यापक बैठक आयोजित की जायेगी। इसके विरोध में सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (जीएसटीए) ने डॉ हर्षवर्धन से मुलाकात कर उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी का हवाला देकर इसे रद्द करने का आग्रह किया था। डॉ हर्षवर्धन ने जीएसटीए के इस अनुरोध पर उपराज्यपाल से संग्यान लेने के लिए पत्र लिखा था।

शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी बैठक को रद्द कराने के लिए डॉ हर्षवर्धन के चिट्ठी लिखने पर निशाना साधा।  सिसोदिया ने शाहबाद डेरी क्षेत्र में गर्वनमेंट बालिका सेकेंडरी विद्यालय का उद्घाटन करने के बाद मीडिया से कहा डॉ. हर्षवर्धन ने चार जनवरी की अभिभावक-अध्यापक बैठक को रद्द कराने के लिए पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा कि बैठक पर राजनीति करने की बजाय शिक्षा के मुद्दे पर चर्चा करो। केंद्र में आपको प्रचंड बहुमत मिला है। केंद्र सरकार के स्कूलों को बेहतर बनाओ। उत्तर प्रदेश और जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है, वहां के स्कूलों को दुरुस्त करो। दिल्ली के तीनों निगमों पर भाजपा काबिज है उसके अधीन आने वाले विद्यालयों को ठीक कीजिए। केवल राजनीति करने के लिए राजधानी के सरकारी स्कूलों में जो अच्छे काम हो रहे हैं, उनको बंद कराने पर क्यों तुले हुए हो?


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