खनिज विभाग के बिना पुलिस की छापामारी!
कलेक्टर के अध्यक्षता में जिले में खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम गठन किया गया है
संयुक्त टीम में तालमेल का अभाव, कोल डिपो में छापे की औपचारिकता
बिलासपुर। कलेक्टर के अध्यक्षता में जिले में खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम गठन किया गया है। मगर खनिज विभाग और पुलिस विभाग के बीच में तालमेल नहीं बनने के कारण अवैध कोयले पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जबकि कलेक्टर ने अवैध कार्रवाई करने के लिए टॉस्क फोर्स का गठन किया गया था।
मगर पुलिस प्रशासन कोल डिपो अकेले जाकर कार्रवाई कर रही है। जब पुलिस की छापामार कार्रवाई हो जाती है तो खनिज विभाग को कोच जप्ती की कार्रवाई के लिए सूचना दी जाती है। टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई इसलिए नहीं हो पा रही है कि दोनों विभागों के बीच तालमेल ही नहीं है। कार्रवाई के पूर्व सूचना लीक होने भी कारण बताया जा रहा है।
टास्क फोर्स ने कहा औपचारिक कार्रवाई की है परंतु कोल माफिया की सेटिंग खनिज विभाग और पुलिस विभाग के साथ होने से छापामार कार्रवाई की पहले से सूचना मिल जाती है। जिसके कारण दोनों विभाग छापामार कार्रवाई को लेकर बचते नजर आते हैं। कोलडिपो में छापा केवल एक औपचारिक रह गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोल माफिया का अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है। जबकि जिले के उच्चाधिकारी जिले में कोयले का अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस विभाग और खनिज विभाग की संयुक्त टीम टास्क फोर्स का गठन किया गया है। मगर पुलिस विभाग हो या खनिज विभाग अवैध कोयले पर संयुक्त कार्रवाई नहीं कर रही है।
पुलिस हो या खनिज जो कोल डिपो में छापामार कार्रवाई का योजना बनाई जाती है तो पुलिस विभाग और खनिज विभाग एक दूसरे को सूचना तक नहीं देते हैं। जब कार्रवाई हो जाती है तो पुलिस विभाग कोयला जप्त करने सूचना दे देता है। जो विभाग कोलडिपो में छापामार कार्रवाई करता है उसकी सेटिंग डिपो संचालक से हो जाती है उसके बाद छापामार कार्रवाई केवल औपचारिक कार्रवाई बन जाती है।
13 बार संयुक्त कार्रवाई
खनिज विभाग और पुलिस विभाग की टीम ने कोलडिपो में अभी तक 13 बार कार्रवाई संयुक्त टीम बनाकर की है। मगर उसके बाद भी जिले में अवैध कोयले का कारोबार से संचालित हो रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जो कोलडिपो संचालक विभागों की सेवा नहीं करते हैं उन कोलडिपो में कार्रवाई केवल सेटिंग बनाने के लिए की जाती है।
कार्रवाई की सूचना लीक!
टास्कफोर्स की छापामार कार्रवाई को लेकर बैठक होती है तो बैठक के बाद योजना कोल माफियों को लीक हो जाती है जिसके कारण कोल माफिया डिपो से अवैध कोयले को दूसरे जगह डंप कर देते हैं। जब टास्क फोर्स की टीम कोल डिपो पहुंचती है तो उनको कुछ टन कोयले का भंडारण मिलता है उसी अवैध कोयले को ेजब्त कर खानापूर्ति कर ली जाती है। जिसके कारण उनका अवैध कोयले का धंधा फलफूल रहा है।
आधी रात को ट्रकों की कतारें
अवैध कोयले का कारोबार आधी रात में जोरों से चलता है। डिपो में रात के समय कोयले से भरी वाहनों की लम्बी लाईन लगी रहती है। जिले में बिना प्रशासनिक अधिकारियों के शह के अवैध कोयले का कारोबार नहीं चल सकता है। सूत्रों से यह भी सूचना मिली है कि कुछ अधिकारी कोल माफिया के साझेदार भी हैं जिसके कारण जिले में कोल डिपो की संख्या में इजाफा होते जा रहा है।
नेताओं और अधिकारियों की शह पर अवैध कोयले का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। टास्क फोर्स का गठन केवल प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह गया है। हर दिन लाखों के अवैध कोयले का कारोबार होता है।
जिले में 87 कोल डिपो
जिले में 87 कोलडिपो संचालित हो रहे हैं। मगर अधिकांश कोलडिपो में चोरी का कोयले का खरीदी-बिक्री हो रही है। जिला प्रशासन टास्क फोर्स की हर तीन माह में समीक्षा बैठक कर दिशा निर्देश देता है। परंतु कोलडिपो में अवैध कोयले पर आज भी लगाम नहीं लगा पाया है।
थानों को अधिकार नहीं
थानों को कोलडिपो में छापामार कार्रवाई का अधिकार नहीं है। इसके बाद भी कोलडिपो में क्षेत्र में थानों द्वारा छापामार कार्रवाई की जा रही है। केवल टास्क फोर्स को कोल डिपो में छापामार कार्रवाई का अधिकार दिया गया है पंरतु पुलिस थाने से भी कोलडिपो में कार्रवाई की जाती है।
केवल टास्क फोर्स एक खानापूर्ति करने वाला विंग बनकर रह गया है।