देखभाल क्षेत्र में कौशल विकास से बढ़ेंगे रोजगार और आर्थिक अवसर: नीति आयोग

देश में देखभाल सेवाओं की मौजूदा और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं का एक मजबूत समूह तैयार करने की जरूरत बढ़ रही है। साथ ही, भारतीय देखभालकर्ता पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की भी आवश्यकता है। यह बात नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में कही गई है।;

Update: 2026-08-06 05:56 GMT

नई दिल्ली। देश में देखभाल सेवाओं की मौजूदा और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं का एक मजबूत समूह तैयार करने की जरूरत बढ़ रही है। साथ ही, भारतीय देखभालकर्ता पेशेवरों के लिए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की भी आवश्यकता है। यह बात नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट में देखभालकर्ताओं को देखभाल व्यवस्था का केंद्र बताया गया है। इसमें देखभाल कार्य को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता देने पर जोर दिया गया है। साथ ही गुणवत्तापूर्ण देखभाल, पेशेवर पहचान, कार्यबल कल्याण, संस्थागत सहयोग और परिवारों व समुदायों को विश्वसनीय तथा किफायती देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता रेखांकित की गई है।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर केयरगिवर्स की बढ़ती मांग भारत के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। इसके माध्यम से भारत पारंपरिक देखभाल सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है, बड़े आर्थिक मूल्य का सृजन कर सकता है और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे देखभालकर्ताओं को बेहतर पहचान और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी। साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान-आधारित विशेषज्ञता और सॉफ्ट पावर को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

यह रिपोर्ट भारत के देखभाल संबंधी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रस्तुत करती है और एक संगठित, पेशेवर, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार देखभाल प्रणाली के निर्माण के लिए एक व्यापक रोडमैप की रूपरेखा तैयार करती है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम के अनुसार, 'सेवा और संवेदना' हमेशा से भारत की सभ्यतागत विचारधारा के केंद्र में रही हैं, और देखभाल करना इन शाश्वत मूल्यों को दर्शाता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मजबूत देखभाल प्रणाली सामाजिक समावेश को मजबूत करेगी, एक देखभाल करने वाले समाज का विकास करेगी, समुदायों को सशक्त बनाएगी, गुणवत्तापूर्ण आजीविका का सृजन करेगी और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

रिपोर्ट में नीति, देखभाल करने वालों की पेशेवर मान्यता, कार्यबल विकास, वैश्विक सहयोग, सामाजिक सुरक्षा, परिवार और समुदाय आधारित देखभाल आदि सहित कई रणनीतिक स्तंभों में अपनी सिफारिशों को व्यवस्थित किया गया है।

नीति आयोग ने कहा कि यह राष्ट्रीय देखभाल नीति और राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद के माध्यम से एक संगठित, पेशेवर देखभाल प्रणाली के लिए एक रोडमैप भी प्रस्तुत करता है।

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