अनुसूचित जाति अत्याचार रोकने को उठाएंगे जरूरी कदम : गहलोत

सरकार ने कहा है कि अनुसूचित जाति के लोगोंं पर होने वाले अत्याचार रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे और देश के किसी भी हिस्से मेें यह अपराध करने वाला कोई अपराधी बच नहीं पाए इसके लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे

Update: 2021-03-20 01:23 GMT

नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि अनुसूचित जाति के लोगोंं पर होने वाले अत्याचार रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे और देश के किसी भी हिस्से मेें यह अपराध करने वाला कोई अपराधी बच नहीं पाए इसके लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को लोकसभा में संविधान अनुसूचित जातियां (आदेश) संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र की तरफ से राज्यों में अनुसूचित जाति के लोगों पर होने वाले अत्याचार संबंधी अपराधों को कम कराने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि अपराधी को दंड और पीड़ित को न्याय मिले।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अनुसूचित जाति के लोगों को न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी का परिणाम है कि 1989 में बने अनुसूचित जाति अत्याचार नियंत्रण कानून में मोदी सरकार ने 2015 में संशोधन किया और इन अपराधों की सूची में 15,16 नए प्रावधान शामिल किए। इसके बाद 2018 को जो प्रतिबंध न्यायालय ने लगाए थे, उनको हटाया गया है और इस कानून में प्राथमिकी को दर्ज करने को लेकर सुधार किया गया।

श्री गहलोत ने कहा कि चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का सवाल उठाया तो उन्हें बताना चाहते हैं कि यह छात्रवृति केंद्र प्रायोजित होती थी और केंद्र से आधे राज्यों को केंद्र से पैसा नहीं मिलता था और अगर मिलता था तो बहुत कम मिलता था। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नियम बदला और 60 प्रतिशत केंद्र तथा 40 प्रतिशत राज्यों की हिस्सेदारी करने की व्यवस्था बनायी और इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। कहीं से कोई शिकायत अब नहीं आ रही है1

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों के लिए आधुनिक यंत्र बनाने की बात की जाती है और यह मामला सदस्यों ने चर्चा के दौरान भी उठाया है। उनका कहना था कि इस दिशा में उनकी सरकार लगातार प्रयास कर रही है ताकि सफाई कर्मचारियों के लिए काम करना आसान हो। बजट में लगातार वृद्धि होने से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए कल्याण संबंधी काम तेजी से किए जा रहे हैं।

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