जंतर-मंतर पर हिंसा मामले की जांच के लिए SC ने गठित की पांच सदस्यीय कमेटी, जानें क्‍या होगा खास

अदालत ने कहा कि समिति में सदस्यों के अनुभव, विशेषज्ञता और विविधता को ध्यान में रखते हुए इसका गठन किया गया है। कोर्ट को उम्मीद है कि समिति की सिफारिशें आगे के फैसलों में मददगार साबित होंगी।;

Update: 2026-08-21 03:27 GMT

नई दिल्ली : Jantar Mantar Protest: नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा के मामलों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी। शीर्ष अदालत ने इन घटनाओं की व्यापक जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन किया है। समिति को दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों और घटनाओं का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के साथ जरूरी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पांच सदस्यीय समिति में कौन-कौन शामिल

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस समिति का गठन किया है। इसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी होंगे। समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश शैलेन्द्र कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. एलआर बिश्नोई को सदस्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 18 अगस्त का आदेश गुरुवार को अपलोड किया गया। आदेश में समिति के गठन की वजह और उसके कामकाज का विस्तृत दायरा निर्धारित किया गया है।

महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोपों की होगी प्राथमिक जांच

अदालत ने कहा कि समिति में सदस्यों के अनुभव, विशेषज्ञता और विविधता को ध्यान में रखते हुए इसका गठन किया गया है। कोर्ट को उम्मीद है कि समिति की सिफारिशें आगे के फैसलों में मददगार साबित होंगी। समिति को कई मुद्दों पर लगातार मूल्यांकन करने और जरूरत के अनुसार अंतरिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। अदालत ने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ से जुड़े आरोपों को प्राथमिकता देने को कहा है।

पुलिस बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की हिंसा दोनों की जांच

हाई पावर कमेटी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर से किए गए कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच करेगी। इसमें पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों और हिंसा में घायल हुए सुरक्षाकर्मियों के मामलों की भी जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत ने समिति को प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों, दोनों पक्षों के घायलों को अंतरिम मुआवजा देने की संभावना पर विचार करने की छूट दी है।

सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भी होगी जांच

प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन भी समिति के दायरे में रखा गया है। इसमें सरकारी प्रतिष्ठानों, वाहनों और राज्य तथा निजी नागरिकों की संपत्तियों में हुई कथित तोड़फोड़ या नुकसान शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को हुए मानसिक एवं भावनात्मक आघात को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए, जितना प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को दिया जाएगा।

गुमनाम शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे लोग

शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को समिति के सामने प्रासंगिक दस्तावेज, साक्ष्य और सुझाव पेश करने की अनुमति दी है। शिकायतकर्ताओं को अपनी शिकायत और संबंधित सामग्री गुमनाम रूप से देने की भी सुविधा होगी, ताकि शिकायतकर्ताओं और गवाहों की पहचान सुरक्षित रखी जा सके। पक्षकारों के बीच बेहतर समन्वय के लिए अधिवक्ता आशिमा मंडला, दक्ष कादियान और आस्था सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

CCTV, ड्रोन और बॉडी कैमरा फुटेज सौंपने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य जांच एजेंसियों को प्रदर्शन से संबंधित सभी उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और रिकॉर्डेड साक्ष्य समिति को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इनमें CCTV फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और PCR कॉल का पूरा रिकॉर्ड शामिल है। संबंधित एजेंसियों को समिति के साथ पूरा सहयोग करने को कहा गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति का गठन पुलिस या सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रशासनिक अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक नहीं लगाएगा। यदि किसी अधिकारी के कर्तव्यों के दौरान नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकेंगे।

पहली अंतरिम रिपोर्ट जल्द देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को समिति के कामकाज के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। समिति के अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर मानदेय, भत्ते और सुविधाएं मिलेंगी, जबकि अन्य सदस्यों का मानदेय चेयरपर्सन तय करेंगे। इसका खर्च भारत सरकार वहन करेगी और समिति को आवश्यक सचिवालय सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा। पीठ ने समिति से जल्द से जल्द अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है। इस जांच के जरिए अदालत प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों, चोटों, संपत्ति के नुकसान और शिकायतों से जुड़े सभी पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन कराना चाहती है।

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