नई दिल्ली।इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत में हो रहे तेज बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि देश वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि हर बार भारत लौटना उनके लिए खास अनुभव होता है, क्योंकि हर दौरे में उन्हें देश में हो रहे परिवर्तन की रफ्तार और भी तेज दिखाई देती है। पिचाई ने भारत के टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में हो रहे व्यापक विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बदलाव केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में इसकी गूंज सुनाई दे रही है। उनके अनुसार, भारत अब केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का सक्रिय भागीदार बन चुका है।
विशाखापत्तनम बनेगा फुल-स्टैक AI हब
अपने संबोधन के दौरान पिचाई ने अपने छात्र जीवन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि आईआईटी खड़गपुर में पढ़ाई के दौरान जब वे विशाखापत्तनम से गुजरते थे, तब वह एक सामान्य तटीय शहर हुआ करता था। पिचाई ने कहा कि “आज वही शहर एक वैश्विक एआई हब के रूप में उभर रहा है। यह बदलाव भारत की क्षमता और दृष्टि को दर्शाता है”। उन्होंने घोषणा की कि गूगल विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर के निवेश के साथ एक फुल-स्टैक एआई हब स्थापित करेगा। इस परियोजना में बड़े पैमाने पर कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा और एक नया सबसी (समुद्र के नीचे) केबल गेटवे भी बनाया जाएगा।
इस निवेश का उद्देश्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करना, डेटा प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाना और वैश्विक कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही, इस पहल से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
‘डिजिटल डिवाइड को AI डिवाइड नहीं बनने देंगे’
सुंदर पिचाई ने अपने संबोधन में डिजिटल असमानता के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस तरह दुनिया ने डिजिटल डिवाइड की चुनौती का सामना किया, उसी तरह अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि डिजिटल खाई, एआई खाई में न बदल जाए। उन्होंने कहा, “अगर हम कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में पर्याप्त निवेश नहीं करेंगे, तो एआई का लाभ सीमित वर्ग तक ही रह जाएगा। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि एआई सबके लिए सुलभ हो।” इस दिशा में गूगल अमेरिका और भारत के बीच चार नए सबसी फाइबर ऑप्टिक सिस्टम विकसित कर रहा है। यह पहल हाल ही में घोषित ‘अमेरिका-इंडिया कनेक्ट’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग को और मजबूत बनाना है।
रोजगार पर AI का प्रभाव: बदलाव और अवसर दोनों
एआई के बढ़ते प्रभाव पर बोलते हुए पिचाई ने स्वीकार किया कि यह तकनीक कार्यक्षेत्र में बड़े बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ नौकरियां ऑटोमेट होंगी, कुछ भूमिकाएं बदलेंगी और कई नई करियर संभावनाएं सामने आएंगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दो दशक पहले ‘प्रोफेशनल यूट्यूब क्रिएटर’ जैसी कोई अवधारणा नहीं थी। आज दुनिया भर में लाखों लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और इससे अपनी आजीविका चला रहे हैं। पिचाई ने कहा कि एआई भी इसी तरह नए अवसरों के द्वार खोलेगा। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि लोग नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार रहें और कौशल विकास पर जोर दिया जाए। उन्होंने कहा, “तकनीकी बदलाव हमेशा नई संभावनाएं लेकर आता है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक लोग इन अवसरों का लाभ उठा सकें।”
‘लोग, धरती और तरक्की’ पर केंद्रित समिट
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस वर्ष समिट का फोकस तीन प्रमुख सूत्रों ‘लोग, धरती और तरक्की’ पर केंद्रित है। इस आयोजन का उद्देश्य एआई के जरिए सामाजिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। एक्सपो में देश-विदेश की सैकड़ों कंपनियां अपने एआई-आधारित समाधान और उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं। यह आयोजन न केवल तकनीकी विशेषज्ञों के लिए, बल्कि नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए भी एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।
वैश्विक भागीदारी और भारत की भूमिका
समिट में कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी रही, जो भारत की बहुपक्षीय सहयोग की नीति को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग आवश्यक है, क्योंकि इसके प्रभाव सीमाओं से परे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। सुंदर पिचाई ने भी इस बात पर जोर दिया कि एआई का विकास जिम्मेदारी और सहयोग के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी कंपनियों, सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर ऐसे मानक विकसित करने होंगे, जो एआई को सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी बनाए रखें।
भारत के लिए क्या मायने?
विशाखापत्तनम में प्रस्तावित एआई हब और सबसी केबल गेटवे परियोजना भारत को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क में और अधिक मजबूती से जोड़ सकती है। इससे डेटा सेंटर उद्योग, क्लाउड सेवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े निवेश भारत को एआई अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे। साथ ही, इससे देश में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
एआई अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में सुंदर पिचाई का संबोधन भारत की तकनीकी प्रगति और संभावनाओं पर केंद्रित रहा। 15 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक टेक कंपनियां भारत को भविष्य की एआई अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र मान रही हैं। पिचाई के शब्दों में, भारत की रफ्तार और परिवर्तन की ऊर्जा दुनिया के लिए प्रेरणा है। अब चुनौती यह होगी कि इस तकनीकी उछाल को समावेशी और टिकाऊ विकास की दिशा में कैसे मोड़ा जाए, ताकि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।