मुकेश अंबानी के कई बड़े एलान, अगले 7 साल में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश, सस्ता और सुलभ AI बनाने का वादा

मुकेश अंबानी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि एआई का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है और भारत इस क्रांति का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। अंबानी ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य एआई को महंगा और सीमित तकनीक नहीं, बल्कि सस्ता और सर्वसुलभ बनाना है, ताकि यह देश के हर वर्ग और हर क्षेत्र तक पहुंचे।

Update: 2026-02-19 07:54 GMT

नई दिल्ली। एआई इम्पैक्ट समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि एआई का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है और भारत इस क्रांति का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। अंबानी ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य एआई को महंगा और सीमित तकनीक नहीं, बल्कि सस्ता और सर्वसुलभ बनाना है, ताकि यह देश के हर वर्ग और हर क्षेत्र तक पहुंचे।

‘एआई का भविष्य दो राहों पर खड़ा’


अपने संबोधन में अंबानी ने कहा कि आज दुनिया एआई को लेकर एक अहम मोड़ पर खड़ी है। एक रास्ता ऐसा है जहां एआई महंगा होगा, सीमित लोगों के नियंत्रण में रहेगा और डेटा भी नियंत्रित होगा। दूसरा रास्ता ऐसा है जिसमें एआई सस्ता, सुलभ और व्यापक रूप से उपलब्ध होगा, जिससे आम लोगों और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि रिलायंस और जियो का संकल्प दूसरे रास्ते को चुनने का है। जिस तरह कंपनी ने भारत में मोबाइल डेटा की कीमतों में भारी कटौती कर डिजिटल क्रांति लाई, उसी तरह अब एआई की लागत कम कर इसे जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

7 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश


मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि जियो और रिलायंस इस वर्ष से शुरुआत करते हुए अगले सात वर्षों में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। यह निवेश एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि जियो इकोनॉमी के हर सेक्टर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और सेवाओं को एआई आधारित सेवाएं प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य भारत को “इंटेलिजेंस युग” से जोड़ना है। अंबानी ने कहा, “हम इंटेलिजेंस की कीमत में भी वैसी ही भारी कटौती करेंगे, जैसी हमने डेटा की कीमतों में की थी।”

AI आधुनिक युग का ‘अक्षय पात्र’


अपने संबोधन में अंबानी ने एआई की तुलना महाभारत के ‘अक्षय पात्र’ से की। उन्होंने कहा कि जैसे अक्षय पात्र कभी खाली नहीं होता था, उसी तरह एआई भी एक ऐसा स्रोत है जो अनंत संभावनाएं देता है। उन्होंने कहा, “AI एक ऐसा मंत्र है जो हर मशीन और सिस्टम को बेहतर और तेज़ बनाता है। हम AI युग की शुरुआत में हैं और इसका सबसे बेहतरीन दौर अभी बाकी है।” अंबानी ने विश्वास जताया कि 21वीं सदी में भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल होगा। लोकतंत्र, युवा जनसंख्या, तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा जनरेशन और एआई क्षमताओं के मामले में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है।

‘AI नौकरियां नहीं छीनता, नए अवसर देता है’


एआई के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चल रही बहस का जिक्र करते हुए अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी यह साबित करेगी कि एआई नौकरियां छीनने वाली तकनीक नहीं है। उन्होंने कहा, “AI नौकरियां खत्म नहीं करता, बल्कि हाई-स्किल नौकरियों के नए अवसर पैदा करता है।” अंबानी के मुताबिक, एआई की प्रतिस्पर्धा अब केवल बेहतरीन मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है। असली मुकाबला इस बात का है कि कौन तेजी और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर सकता है। इसी उद्देश्य से रिलायंस भारतीय कंपनियों, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक समूहों के साथ गहरी साझेदारी करेगा।

‘सॉवरेन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की तैयारी


मुकेश अंबानी ने जियो इंटेलिजेंस के तहत भारत का अपना ‘सॉवरेन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर’ विकसित करने की घोषणा की। यह इंफ्रास्ट्रक्चर गीगावाट (GW) स्तर के अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स के माध्यम से तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गुजरात के जामनगर में मल्टी-गीगावाट एआई डेटा सेंटर का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। 2026 के दूसरे हिस्से तक 120 मेगावाट (MW) से अधिक की क्षमता शुरू कर दी जाएगी। अंबानी ने कहा कि रिलायंस के पास खुद की बिजली उत्पादन सुविधा और देशभर में फैला ‘एज कंप्यूट’ नेटवर्क है। इससे एआई सेवाओं की स्पीड बढ़ेगी और लागत कम होगी। यह इंफ्रास्ट्रक्चर भारतीय नागरिकों के रहने, पढ़ने और काम करने वाली जगहों के नजदीक होगा, जिससे सेवाएं अधिक प्रभावी और सुलभ बन सकेंगी।

भारत के लिए रणनीतिक बढ़त


अंबानी ने कहा कि आने वाले दशकों में भारत डेटा और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में दुनिया की अगुवाई कर सकता है। भारत की विशाल जनसंख्या, तेजी से बढ़ता इंटरनेट उपयोग और स्टार्टअप इकोसिस्टम इसे एआई अपनाने के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल तकनीक का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि उसका निर्माता और निर्यातक बनना है। 


तीन प्रमुख घोषणाएं


अपने भाषण के दौरान अंबानी ने तीन प्रमुख घोषणाएं कीं

एआई को सस्ता और सर्वसुलभ बनाना।

भारत का सॉवरेन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना। 

एआई के जरिए रोजगार और उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित करना।


स्पष्ट रोडमैप


एआई इम्पैक्ट समिट में मुकेश अंबानी का संबोधन भारत की डिजिटल और तकनीकी दिशा को लेकर एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है। 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश, सॉवरेन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ती एआई सेवाओं के वादे के साथ रिलायंस ने संकेत दिया है कि वह भारत को एआई युग में अग्रणी बनाने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन घोषणाओं को जमीन पर किस गति और प्रभाव के साथ लागू किया जाता है, और क्या भारत वास्तव में एआई क्रांति का वैश्विक केंद्र बन पाता है।

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