नौकरियों पर डर का जवाब
युवाओं में एआइ के कारण नौकरियां जाने की आशंकाओं पर प्रधानमंत्री ने कहा कि “डर का सबसे बड़ा समाधान तैयारी है।” उन्होंने बताया कि सरकार एआइ युग के अनुरूप स्किलिंग और री-स्किलिंग कार्यक्रमों पर विशेष जोर दे रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह भविष्य की तैयारी नहीं बल्कि वर्तमान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है-तकनीकी नवोन्मेष काम को समाप्त नहीं करता बल्कि उसके स्वरूप को बदल देता है। नई तरह की नौकरियां पैदा होती हैं और पुरानी भूमिकाएं नए रूप में विकसित होती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि एआइ एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ है, जो डॉक्टरों, वकीलों और शिक्षकों को पहले से कहीं अधिक लोगों तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा। इससे सेवाओं का विस्तार होगा और कार्यबल की उत्पादकता बढ़ेगी।ग्रामीण-शहरी खाई कम करने में एआइ की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में एआइ आधारित समाधान ग्रामीण-शहरी अंतर को कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधार और यूपीआइ जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर एआइ की परत जोड़कर जनसेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। इससे लाभार्थियों तक योजनाओं का सीधा और तेज पहुंच सुनिश्चित हो रही है। सरकार डेटा सुरक्षा, डीपफेक रोकथाम और साइबर सुरक्षा पर समानांतर रूप से काम कर रही है, ताकि एआइ के विस्तार के साथ जोखिमों को भी नियंत्रित किया जा सके।“भविष्य का नेतृत्व करेंगे हमारे युवा”
पीएम मोदी ने युवाओं को एआइ युग का नेतृत्वकर्ता बताते हुए कहा कि सही कौशल और तैयारी के साथ भारत का युवा वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सदियों से यह आशंका जताई जाती रही है कि नई तकनीकें रोजगार खत्म कर देंगी, लेकिन इतिहास ने दिखाया है कि हर तकनीकी क्रांति नए अवसर लेकर आई है। एआइ भी इसी क्रम को आगे बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि एआइ भारत के कार्यबल को सशक्त बनाएगा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।वैश्विक सूचकांकों में भारत की मजबूत स्थिति
प्रधानमंत्री ने स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआइ वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इस सूची में तीसरे स्थान पर रहा है। उन्होंने इसे एआइ अनुसंधान, विकास, प्रतिभा और आर्थिक क्षमता में भारत की मजबूत बढ़त का प्रमाण बताया। उनके अनुसार, नवोन्मेष और समावेशिता के समन्वय से भारत न केवल एआइ तकनीक अपनाएगा, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर दिशा भी देगा।आत्मनिर्भर भारत और एआइ के तीन स्तंभ
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआइ, विकसित भारत 2047 की यात्रा में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ केवल तकनीक का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि उसका निर्माता बनना है। एआइ के संदर्भ में उन्होंने तीन स्तंभों का उल्लेख किया-संप्रभुता, समावेशिता और नवोन्मेष। संप्रभुता: भारत अपना डिजिटल कोड स्वयं लिखे और तकनीकी निर्णयों में स्वतंत्र रहे।समावेशिता: एआइ का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
नवोन्मेष: अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर नई तकनीकों का विकास किया जाए। उन्होंने कहा कि इंडिया एआइ मिशन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि एआइ का विकास भारतीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करे और देश को जिम्मेदार एआइ नेता के रूप में स्थापित करे।