लोकसभा में राहुल गांधी ने कहा- ‘पेपर लीक नहीं, यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा विश्वास का संकट’

एंटी पेपर लीक विधेयक पर राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल;

Update: 2026-07-29 08:18 GMT

नई दिल्ली: लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर घेरा। उन्होंने कहा कि हाल के छात्र आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश का युवा अपने भविष्य को लेकर गंभीर है और उसकी आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा की समस्या नहीं, बल्कि युवाओं के भरोसे और भविष्य से जुड़ा बड़ा संकट बन चुका है।

'देश का भविष्य सड़कों पर उतरा, युवाओं की बात सुननी होगी'

राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहा था और सभी राजनीतिक दलों को युवाओं की भावनाओं को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्र गुस्से में जरूर थे, लेकिन उनके भीतर नफरत नहीं थी। उनके अनुसार, छात्र अपने अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे। राहुल गांधी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को उन छात्रों पर गर्व होना चाहिए, जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भी अपने बच्चों से पूछना चाहिए कि वे इस आंदोलन के बारे में क्या सोचते हैं, क्योंकि युवाओं की चिंता राजनीतिक सीमाओं से परे है।

शिक्षा व्यवस्था और महंगी पढ़ाई पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं और प्रतिदिन कई घंटे पढ़ाई में लगाते हैं। इसके बावजूद यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं रह जाता, तो सबसे अधिक नुकसान ईमानदार छात्रों को होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी युवाओं के भविष्य पर गंभीर असर डाल रही है। उनके अनुसार, छात्र बदलती दुनिया को समझ रहे हैं और वे व्यवस्था में जवाबदेही चाहते हैं।

एक टिप्पणी पर सदन में हंगामा

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एक टिप्पणी करते हुए तीन श्रेणियों का उल्लेख किया, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई सदस्यों ने इसे असंसदीय बताते हुए कार्यवाही से हटाने की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि कोई शब्द संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं होगा तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से भाषा की गरिमा बनाए रखने और संयमित शब्दों का प्रयोग करने की अपील भी की। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को संबोधित करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि किसी शब्द पर आपत्ति है तो वह उसका दूसरा विकल्प इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इस मुद्दे पर कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा जारी रहा।

'परीक्षा प्रणाली नहीं, वसूली का तंत्र बन गया है'

राहुल गांधी ने परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेपर तैयार करने से लेकर उसके वितरण और मूल्यांकन तक कई स्तरों पर पारदर्शिता की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में ईमानदार और मेहनती छात्रों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अनियमितताओं के कारण कुछ लोग अनुचित लाभ प्राप्त कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल परीक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि छात्रों पर आर्थिक और मानसिक दबाव डालने वाला तंत्र बनता जा रहा है।

निजी एजेंसियों और शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

अपने भाषण में राहुल गांधी ने परीक्षा संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था पर वैचारिक प्रभाव बढ़ा है और इससे संस्थानों की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय की नीतियों को लेकर व्यापक बहस की आवश्यकता है।

सरकार से व्यापक सुधार की मांग

राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों का विश्वास कमजोर किया है। उनके अनुसार, केवल कठोर कानून बना देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी है। एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर जारी बहस के बीच राहुल गांधी के भाषण ने शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर संसद में व्यापक राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे दी।

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