आईएएस रिंकू दुग्गा की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, केंद्र की याचिका पर नोटिस जारी, 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा की बहाली पर फिलहाल रोक लगा दी है। अपने कुत्ते को घुमाने के लिए दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को खाली कराने के विवाद में केंद्र सरकार द्वारा जबरन रिटायर की गईं आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बहाली का आदेश दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।;
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा की बहाली पर फिलहाल रोक लगा दी है। अपने कुत्ते को घुमाने के लिए दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को खाली कराने के विवाद में केंद्र सरकार द्वारा जबरन रिटायर की गईं आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बहाली का आदेश दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) के उन्हें बहाल करने के आदेश को बरकरार रखा गया था। इस मामले की अगली सुनवाई अब 13 अक्टूबर को होगी।
दरअसल, यह पूरा विवाद 2022 में शुरू हुआ था, जब आरोप लगे थे कि आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा और उनके आईएएस पति संजीव खिरवार ने दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को समय से पहले खाली करवा दिया था ताकि वह अपने कुत्ते को वहां घुमा सकें। उस समय स्टेडियम में खिलाड़ी और कोच प्रैक्टिस कर रहे थे, जिन्हें बाहर निकाल दिया गया था। घटना की तस्वीरें और मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने के बाद पूरे देश में इस मामले पर हंगामा मच गया था।
विवाद बढ़ने के बाद गृह मंत्रालय ने कड़ा एक्शन लेते हुए दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया था। रिंकू दुग्गा को अरुणाचल प्रदेश भेजा गया था, जबकि उनके पति को लद्दाख ट्रांसफर किया गया था। बाद में केंद्र सरकार ने समीक्षा के बाद रिंकू दुग्गा को एफआर 56 (जे) के तहत जबरन रिटायर कर दिया था। सरकार ने दलील दी थी कि उनका सर्विस रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं है।
इस फैसले के खिलाफ रिंकू दुग्गा ने सीएटी में याचिका दायर की थी। सीएटी ने केंद्र के फैसले को गलत ठहराते हुए उन्हें बहाल करने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट गई, लेकिन हाईकोर्ट ने भी सीएटी के फैसले को बरकरार रखा।