रूस से तेल खरीद पर भारत ने स्थिति को किया स्पष्ट, लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का मूल उद्देश्य देश की जरूरतों को सुरक्षित और स्थिर तरीके से पूरा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा खरीद के संबंध में उठाया जाने वाला हर कदम राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही तय किया जाता है।

Update: 2026-02-05 22:01 GMT
नई दिल्ली : भारत ने साफ किया है कि 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी आधार पर कच्चे तेल की खरीद को लेकर रणनीति तय की जाती है। विदेश मंत्रालय का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का मूल उद्देश्य देश की जरूरतों को सुरक्षित और स्थिर तरीके से पूरा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा खरीद के संबंध में उठाया जाने वाला हर कदम राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही तय किया जाता है।

“ऊर्जा खरीद में विविधता हमारी रणनीति का हिस्सा”

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “जहां तक भारत की ऊर्जा खरीद का सवाल है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने आगे कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और बाजार की स्थितियों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है। “बाजार की स्थितियों और वैश्विक घटनाक्रम को देखते हुए ऊर्जा खरीद में विविधता लाना हमारी दीर्घकालिक रणनीति का मुख्य आधार है। भविष्य में भी हम इसी सिद्धांत का पालन करेंगे।” जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत वेनेजुएला समेत कच्चे तेल की आपूर्ति के किसी भी नए और व्यवहार्य विकल्प पर विचार करने के लिए खुला है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस से तेल खरीद में कोई तत्काल बदलाव किया जाएगा या नहीं।

ट्रंप के दावे के बाद स्पष्टिकरण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते की घोषणा की थी। इसी दौरान ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है और वह अमेरिका तथा वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा। हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि रूस से तेल आयात पूरी तरह रोका जाएगा। जानकारों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक बाजार की कीमतों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा। रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है, विशेष रूप से रियायती दरों पर उपलब्ध कच्चे तेल के कारण।

भारत की ऊर्जा नीति


विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति परंपरागत रूप से बहुस्तरीय और व्यावहारिक रही है। भारत पश्चिम एशिया, रूस, अमेरिका और अन्य देशों से कच्चा तेल आयात करता है। किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने और आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में विकल्प बनाए रखने की नीति लंबे समय से अपनाई जाती रही है। विदेश मंत्रालय के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत किसी भी देश विशेष के दबाव में नहीं, बल्कि अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के आधार पर निर्णय लेगा। ऊर्जा सुरक्षा, मूल्य स्थिरता और आपूर्ति की निरंतरता जैसे कारक नीति निर्धारण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

भारतीय नाविकों पर अपडेट

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने ईरान में हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिकों के संबंध में भी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर में ईरान द्वारा जब्त किए गए एक जहाज के चालक दल के 16 भारतीय सदस्यों में से आठ को रिहा कर दिया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने हिरासत में लिए गए सभी भारतीयों को काउंसलर पहुंच उपलब्ध कराई थी और मामले को राजनयिक स्तर पर उठाया गया। शेष आठ भारतीयों की रिहाई के प्रयास जारी हैं। सरकार ने कहा है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है।

डोभाल-रूबियो मुलाकात की खबर का खंडन

विदेश मंत्रालय ने एक मीडिया रिपोर्ट को भी खारिज किया, जिसमें दावा किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सितंबर में व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए वाशिंगटन गए थे और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि डोभाल ने रूबियो से कहा कि भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप धमका नहीं पाएंगे। विदेश मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया। प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा, “डोभाल की तरफ से इस तरह की कोई अमेरिका यात्रा नहीं की गई थी।” मंत्रालय ने इस खबर को निराधार बताते हुए मीडिया से जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपेक्षा जताई।

ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप लचीले और संतुलित तरीके से संचालित करेगा। रूस से तेल खरीद बंद करने के संबंध में अमेरिकी दावों पर भारत ने सीधे तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिक आधार बताया है। साथ ही, ईरान में हिरासत में लिए गए भारतीय नाविकों की रिहाई और एनएसए की कथित अमेरिका यात्रा पर स्पष्टिकरण ने यह दर्शाया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की नीति अपना रही है। आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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