मुंबई : मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम हुए टैंकर हादसे के बाद लगा भीषण जाम आखिरकार 33 घंटे बाद समाप्त हो गया। बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात करीब 1:46 बजे यातायात दोबारा बहाल किया गया। इस दौरान हजारों वाहन 20 किलोमीटर तक लंबी कतारों में फंसे रहे। जाम में आम यात्रियों के साथ पुणे के उद्योगपति सुधीर मेहता भी शामिल थे, जिन्हें आठ घंटे तक फंसे रहने के बाद हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया।
कैसे हुआ हादसा?
मंगलवार शाम करीब पांच बजे मुंबई की ओर जाने वाले मार्ग पर एक टैंकर पलट गया। टैंकर में प्रोपलीन गैस भरी थी, जिसके चलते स्थिति और संवेदनशील हो गई। सुरक्षा कारणों से तत्काल यातायात रोक दिया गया और क्षेत्र को घेर लिया गया। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और एक्सप्रेसवे पर भारी जाम की स्थिति बन गई।
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के अधिकारियों के अनुसार, गैस से भरे टैंकर को हटाने से पहले उसमें मौजूद प्रोपलीन को सुरक्षित रूप से अन्य टैंकरों में स्थानांतरित करना जरूरी था। यह प्रक्रिया बेहद सावधानी और विशेषज्ञ निगरानी में पूरी की गई। गैस ट्रांसफर होने के बाद क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त टैंकर को हटाया गया, जिसके बाद देर रात यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ।
20 किलोमीटर लंबी कतारें, यात्रियों की मुश्किलें
हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर करीब 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हजारों वाहन घंटों तक वहीं खड़े रहे। कई परिवारों को रात गाड़ियों में ही गुजारनी पड़ी। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यात्रियों के पास न पर्याप्त भोजन था, न पानी और न ही शौचालय की सुविधा। कई छोटे बच्चे दूध न मिलने के कारण रोते-बिलखते रहे। सोशल मीडिया पर भी फंसे यात्रियों ने हालात की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनमें सड़क पर खड़ी गाड़ियों की अंतहीन कतारें दिखाई दीं।
उद्योगपति सुधीर मेहता का एयरलिफ्ट
जाम में फंसे प्रमुख लोगों में पिनैकल इंडस्ट्रीज और ईकेए मोबिलिटी के अध्यक्ष सुधीर मेहता भी शामिल थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि वे करीब आठ घंटे तक जाम में फंसे रहे। इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर की व्यवस्था करवाई और एयरलिफ्ट होकर पुणे लौटे। मेहता ने एक्सप्रेसवे पर लगे जाम की तस्वीरें भी साझा कीं और कहा कि यह घटना हाई-स्पीड कॉरिडोर पर बेहतर आपातकालीन प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता को उजागर करती है। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की परिस्थितियों में वैकल्पिक यातायात मार्ग, मेडिकल सहायता और बेसिक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रशासन की कार्रवाई
MSRDC अधिकारियों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। चूंकि टैंकर में ज्वलनशील गैस थी, इसलिए किसी भी प्रकार का जोखिम उठाए बिना पूरी सावधानी बरती गई। गैस को अन्य टैंकरों में स्थानांतरित करने में कई घंटे लगे। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार देर रात गैस ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दुर्घटनाग्रस्त टैंकर को क्रेन से हटाया गया। इसके बाद सड़क की सफाई और सुरक्षा जांच की गई, ताकि यातायात सुरक्षित रूप से शुरू किया जा सके। अंततः गुरुवार तड़के 1:46 बजे यातायात बहाल कर दिया गया।
आपातकालीन प्रबंधन पर उठे सवाल
इस घटना ने एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर आपातकालीन तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे देश के सबसे व्यस्त और हाई-स्पीड कॉरिडोर में से एक है, जहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मार्गों पर दुर्घटना की स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाने, ट्रैफिक डायवर्जन, मोबाइल मेडिकल यूनिट, पानी और खाद्य सामग्री की आपूर्ति जैसी व्यवस्थाएं पहले से तैयार होनी चाहिए। लंबा जाम न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना, बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाल सकता है।
सामान्य हुआ यातायात, लेकिन याद रहेगी घटना
करीब 33 घंटे की मशक्कत के बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य हो गया है। हालांकि, इस घटना ने यात्रियों को गहरी असुविधा और तनाव का अनुभव कराया। प्रशासन ने भविष्य में ऐसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने का भरोसा दिया है। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर लगा यह जाम केवल एक ट्रैफिक बाधा नहीं था, बल्कि आपातकालीन ढांचे की परीक्षा भी था। अब देखना होगा कि संबंधित एजेंसियां इससे क्या सबक लेती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए किस तरह की ठोस तैयारी सुनिश्चित करती हैं।