प्रभावशाली नेताओं और अफसरों को बचा रही सीआईडी: बाबूलाल मरांडी
रांची, झारखंड में जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही सीआईडी पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल उठाए हैं।;
रांची, झारखंड में जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही सीआईडी पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में शामिल अधिकारियों पर प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों या उनके कथित बिचौलियों से जुड़े नामों को बयानों में दर्ज नहीं करने का दबाव बनाया जा रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए जांच से जुड़े मूल बयानों, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की अपील की है। रविवार को मरांडी ने दावा किया कि जांच से जुड़े कुछ छोटे अधिकारियों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर उन्हें ऐसी शिकायतें दी हैं। उनके अनुसार, पूछताछ के दौरान यदि कोई व्यक्ति रिश्वत के लेन-देन में किसी बड़े नेता, अधिकारी या बिचौलिए की भूमिका की जानकारी देता है, तो कथित तौर पर बयान से उस हिस्से को हटाने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि ये शिकायतें सही हैं तो यह जांच के नाम पर सच्चाई दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का गंभीर मामला है। इतने संवेदनशील मामले में बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए और मूल रिकॉर्डिंग को बिना किसी काट-छांट के सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने सीआईडी की जांच की दिशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर जांच को गलत दिशा में ले जाने, साक्ष्य नष्ट करने और नियुक्ति में घोटाले से इनकार करने जैसे गंभीर सवाल उठे थे। बाद में छात्रों और बेरोजगारों के विरोध के बीच सीआईडी की कार्रवाई में बदलाव आया। उन्होंने कहा कि इससे जांच के शुरुआती रुख की जवाबदेही का सवाल भी उठता है।
मरांडी ने कहा कि अब मनोज कौशिक के नेतृत्व में चल रही सीआईडी जांच को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं कि छोटी मछलियों को पकड़कर बड़े आरोपियों और कथित सरगनाओं को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों का जवाब निष्पक्ष जांच और सुरक्षित साक्ष्यों के जरिए दिया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिना देर किए मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा करने और सभी मूल बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नियुक्ति परीक्षाओं में अनियमितता का असर सीधे छात्रों और बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। मामले में केवल कथित घोटाले की ही नहीं, बल्कि जांच को प्रभावित करने या साक्ष्य दबाने की शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही, जिन अधिकारियों के पुराने कार्यकाल से जुड़े गंभीर आरोप या प्रमाण सामने आते हैं, उनकी भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ हुए अन्याय की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के साथ उन्हें बचाने वालों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।