रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों पर केंद्र की रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट को बताया कितनों की मौत, कितने लापता
केंद्र ने कहा कि कूटनीतिक स्तर पर लगातार किए गए प्रयासों के कारण 139 भारतीयों को रूसी सेना के अनुबंध से मुक्त कराकर सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है।;
नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना के साथ जुड़े भारतीय नागरिकों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है। सरकार ने अदालत को बताया कि अब तक कुल 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए थे, जिनमें से 49 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्र ने यह भी कहा कि कूटनीतिक स्तर पर लगातार किए गए प्रयासों के कारण 139 भारतीयों को रूसी सेना के अनुबंध से मुक्त कराकर सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है। यह मामला उन भारतीयों से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर नौकरी और बेहतर भविष्य के नाम पर रूस ले जाया गया और बाद में युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।
कई भारतीय अब भी लापता
केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, छह भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं। इसके अलावा 23 अन्य लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। सरकार ने बताया कि मास्को स्थित भारतीय दूतावास लगातार रूसी अधिकारियों के संपर्क में है और इन लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। प्रभावित परिवारों को भी समय-समय पर जानकारी दी जा रही है। अदालत को यह भी बताया गया कि लापता लोगों की पहचान और शवों के मिलान की प्रक्रिया के लिए 21 परिवारों के डीएनए नमूने रूस भेजे गए हैं।
नौकरी के नाम पर रूस भेजे जाने का आरोप
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नौकरी का झांसा देकर कई भारतीयों को रूस भेजा गया और बाद में उन्हें जबरन रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में भेज दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि सरकार इन भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे और मामले की निष्पक्ष जांच कराए। सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी बताया गया कि याचिका में जिन 26 भारतीयों का उल्लेख किया गया था, उनमें से 14 की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 11 अन्य को रूसी अधिकारियों ने “मिसिंग इन एक्शन” घोषित किया है या उनका अपने परिवारों से संपर्क टूट चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत के सामने सरकार की स्थिति रखी। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास इस मुद्दे को गंभीरता से संभाल रहे हैं और प्रभावित परिवारों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
एक भारतीय को रूस में सजा
स्थिति रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि रूस में मौजूद एक भारतीय नागरिक को छेड़छाड़ के एक मामले में आठ साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि सरकार ने इस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की। अदालत में यह जानकारी भी दी गई कि कुछ मामलों में परिवारों का अपने परिजनों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
आकर्षक वेतन और नागरिकता के वादों का जिक्र
केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कई भारतीय बेहतर कमाई और विदेशी अवसरों के लालच में रूसी सेना से जुड़े। रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती के समय आकर्षक आर्थिक पैकेज का प्रस्ताव दिया गया था। इसमें लगभग 5,000 डॉलर का साइनिंग बोनस, करीब 2,500 डॉलर मासिक वेतन और युद्ध में मौत होने की स्थिति में परिवार को लगभग 1.68 लाख डॉलर का मुआवजा देने का वादा शामिल था। इसके अलावा रूसी नागरिकता देने जैसे आश्वासन भी कई लोगों को दिए गए थे।
सरकार ने कहा- सभी मामलों को प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस पूरे मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और अन्य एजेंसियां मिलकर भारतीय नागरिकों की पहचान, वापसी और उनके परिवारों की मदद के लिए लगातार काम कर रही हैं। सरकार ने यह भी कहा कि जहां संभव होगा, वहां कूटनीतिक माध्यमों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की कोशिश जारी रहेगी।
युद्ध में फंसे भारतीयों को लेकर बढ़ी चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की खबरों ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। यह मामला अब केवल विदेश नीति या कूटनीतिक प्रयासों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विदेशों में नौकरी के नाम पर होने वाले जोखिम और मानव तस्करी जैसे गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।