दिवाली से ठीक पहले अमूल ने दिया झटका, बढ़ा दिए घी और बटर के दाम

कीमतों में इस बदलाव से त्योहार के दौरान मिठाइयां और पकवान बनाने वाले परिवारों का खर्च बढ़ सकता है। घी और बटर की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब दिवाली की खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। कई बाजारों में अमूल के गाय के घी की मांग बढ़ने और इसकी उपलब्धता कम होने की खबरें भी सामने आ रही हैं।;

Update: 2026-11-04 09:22 GMT

नई दिल्ली: दिवाली से पहले देश के आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगा है। देश के प्रमुख डेयरी ब्रांड अमूल ने घी और बटर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों के मुताबिक, एक किलो घी के कार्टन की कीमत 630 रुपये से बढ़ाकर 680 रुपये कर दी गई है। वहीं, 500 ग्राम बटर का पैक अब 310 रुपये के बजाय 325 रुपये में मिलेगा। कीमतों में इस बदलाव से त्योहार के दौरान मिठाइयां और पकवान बनाने वाले परिवारों का खर्च बढ़ सकता है। घी और बटर की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब दिवाली की खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। कई बाजारों में अमूल के गाय के घी की मांग बढ़ने और इसकी उपलब्धता कम होने की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकाने के साथ-साथ पसंदीदा उत्पाद खरीदने में भी परेशानी हो सकती है।

अमूल घी और बटर के नए रेट

अमूल ने अपने घी और बटर के कुछ पैक की कीमतों में बदलाव किया है। नई दरों के अनुसार, एक किलो घी के कार्टन पर 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, 500 ग्राम घी के पाउच की कीमत भी 20 रुपये बढ़ गई है। बटर की कीमतों में भी बदलाव हुआ है। 100 ग्राम बटर के पैक की कीमत तीन रुपये बढ़ाकर 66 रुपये कर दी गई है। जबकि 500 ग्राम बटर के पैक पर 15 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

उपभोक्ताओं के लिए नई और पुरानी कीमतों का विवरण इस प्रकार है।

उत्पाद पुरानी कीमत नई कीमत बढ़ोतरी

1 किलो घी कार्टन ₹630 ₹680 ₹50

500 ग्राम घी पाउच ₹325 ₹345 ₹20

100 ग्राम बटर ₹63 ₹66 ₹3

500 ग्राम बटर ₹310 ₹325 ₹15

इन दरों के मुताबिक, घी और बटर खरीदने वाले ग्राहकों को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना होगा। खासकर बड़ी मात्रा में डेयरी उत्पाद खरीदने वाले परिवारों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है।

गाय के घी की मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव

अमूल के घी की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ कुछ शहरों में इसकी उपलब्धता कम होने की जानकारी भी सामने आई है। खासकर गाय के घी की मांग बढ़ने से बाजार में सप्लाई प्रभावित होने की बात कही जा रही है। गुजरात और पड़ोसी राज्य राजस्थान में मिलावटी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ब्रांडेड घी की मांग बढ़ने की खबरें हैं। इससे उपभोक्ता भरोसेमंद कंपनियों के उत्पादों की ओर अधिक रुख कर रहे हैं। दिवाली के दौरान घी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाइयों, पूजा-पाठ और घर में तैयार होने वाले पकवानों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में मांग बढ़ने और उपलब्धता कम होने से बाजार में दबाव की स्थिति बन सकती है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अलग-अलग कीमतें

रिपोर्ट के मुताबिक, अमूल के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घी की विभिन्न किस्मों के अलग-अलग दाम सूचीबद्ध हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गाय का घी 740 रुपये प्रति लीटर, सागर घी 710 रुपये, प्योर घी 700 रुपये और भैंस का घी 720 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर उपलब्धता के लिए सूचीबद्ध किया गया है। हालांकि, ऑनलाइन खरीदारी करने वालों को भी सप्लाई संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्योर घी, भैंस के घी और कुछ कॉम्बो पैक आउट ऑफ स्टॉक दिखाई दे रहे थे। इससे संकेत मिलता है कि त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के कारण कुछ उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमतें और स्टॉक अलग-अलग समय पर बदल सकते हैं।

जीएसटी कटौती का फायदा भी हुआ कम

सितंबर 2025 में डेयरी उत्पादों पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई थी। इस फैसले से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन घी और बटर की नई कीमतों में बढ़ोतरी के बाद टैक्स कटौती से मिलने वाला फायदा काफी हद तक कम हो गया है। इससे त्योहारों के दौरान घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

दिवाली की मिठाइयां और पकवान होंगे महंगे

दिवाली पर घरों में मिठाइयां, नमकीन और पारंपरिक पकवान बनाने की तैयारी होती है। इन खाद्य पदार्थों में घी और बटर का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाता है। ऐसे में दोनों उत्पादों के महंगे होने से त्योहार की खरीदारी का बजट प्रभावित हो सकता है। ग्राहकों के सामने एक तरफ बढ़ी हुई कीमतों की चुनौती है, तो दूसरी तरफ कुछ बाजारों में उत्पादों की उपलब्धता का सवाल भी है। अब त्योहार के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमूल मांग के अनुरूप सप्लाई बनाए रख पाता है या नहीं। फिलहाल उपभोक्ताओं को घी और बटर खरीदने के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

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